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शी जिनपिंग ने 'ग्रेटर ब्रिक्स' में आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया, वैश्विक भूमिका का विस्तार है लक्ष्य

Summary
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 'ग्रेटर ब्रिक्स' देशों के बीच आर्थिक संबंधों को गहरा करने के लिए कई नई पहलों की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य वैश्विक मंच पर इस समूह के प्रभाव को बढ़ाना और ग्लोबल साउथ के विकास को बढ़ावा देना है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में 'ग्रेटर ब्रिक्स' उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को गहरा करने के लिए कई नई पहलों का अनावरण किया। इन पहलों का उद्देश्य इस समूह को ग्लोबल साउथ के विकास के लिए एक व्यावहारिक मंच के रूप में स्थापित करना है।
प्रमुख पहलें और उद्देश्य
आधिकारिक शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, शी ने नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 'ग्रेटर ब्रिक्स इनिशिएटिव' की सफलता व्यावहारिक सहयोग के लिए एक ठोस नींव रखने पर निर्भर करती है। उन्होंने औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता बनाए रखने और एक एकीकृत बाजार विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
चीन द्वारा प्रस्तावित प्रमुख पहलों में शामिल हैं:
- ब्रिक्स एआई ओपन सोर्स ज़ोन (BRICS AI Open Source Zone): चीन बड़े भाषा मॉडल (LLMs), एआई प्रशिक्षण और एक खुले एआई इकोसिस्टम पर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र की स्थापना का नेतृत्व करेगा।
- ब्रिक्स विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी: व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zone) की साझेदारी का प्रस्ताव रखा गया।
- ब्रिक्स सर्विस ट्रेड फोरम: चीन अगले साल व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने के लिए इस फोरम की मेजबानी करेगा।
'ग्रेटर ब्रिक्स' का विस्तार और वैश्विक दृष्टिकोण
Adब्रिक्स समूह का विस्तार हुआ है, जिसमें मूल सदस्य ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा ईरान, इंडोनेशिया, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे नए देश शामिल हुए हैं। इसके अतिरिक्त, 10 भागीदार देश एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व की उभरती अर्थव्यवस्थाओं से हैं, जिससे ग्लोबल साउथ में इसकी पहुंच बढ़ गई है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स को एक नई, अधिक निष्पक्ष और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था बनाने की दिशा में एक शक्तिशाली प्रेरक शक्ति बताया। वहीं, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ब्रिक्स के भीतर विकसित समाधानों का लाभ केवल समूह तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ग्लोबल साउथ की जरूरतों को पूरा करने के लिए सुलभ होना चाहिए।
भू-राजनीतिक संदर्भ
यह शिखर सम्मेलन मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच आयोजित किया गया। इसके बावजूद, समूह ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता हासिल की, जब उसने ईरान और संयुक्त अरब अमीरात द्वारा समर्थित एक संयुक्त घोषणा पर आम सहमति बनाई। घोषणा में मध्य पूर्व में तनाव के बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई और अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया गया।