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चीन ने हीलियम निर्यात पर लगाई रोक, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर बढ़ा दबाव

Summary
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच चीन ने सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हीलियम गैस के निर्यात को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है, जिससे वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
चीन ने शुक्रवार को तत्काल प्रभाव से हीलियम के निर्यात पर रोक लगा दी है। Investing.com की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम मध्य पूर्व में फिर से बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है, जिसका उद्देश्य घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित करना है।
यह निर्णय सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि हीलियम चिप निर्माण प्रक्रिया में एक अनिवार्य गैस है।
सेमीकंडक्टर उद्योग पर असर
हीलियम का उपयोग सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन में उपकरणों को ठंडा करने और चिप उत्पादन के कई चरणों में किया जाता है। इसमें वेफर कूलिंग, प्लाज्मा एचिंग, और लिथोग्राफी सपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं शामिल हैं।
इस निर्यात प्रतिबंध से वैश्विक चिप निर्माताओं के लिए आपूर्ति की कमी और लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जो पहले से ही भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। चीन में स्थित निर्माताओं पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि वे भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर हैं।
वैश्विक आपूर्ति की चिंताएं और चीन की निर्भरता
Adचीन सीमित मात्रा में हीलियम का निर्यात करने के बावजूद, अपनी घरेलू जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की हीलियम खपत का लगभग 85% हिस्सा आयातित आपूर्ति से पूरा होता है।
- कतर प्रमुख आपूर्तिकर्ता: हाल के वर्षों में, दुनिया के सबसे बड़े हीलियम निर्यातकों में से एक, कतर ने चीन के हीलियम आयात का 50% से अधिक हिस्सा प्रदान किया है।
- मध्य पूर्व का तनाव: ईरान से जुड़े पिछले संघर्षों ने कतर से होने वाले निर्यात को बाधित किया था, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरी उजागर हुई थी। मौजूदा तनाव से इन आपूर्तियों पर फिर से खतरा मंडरा रहा है।
चीन की व्यापक रणनीति
हीलियम पर यह प्रतिबंध चीन द्वारा रणनीतिक सामग्रियों के निर्यात को नियंत्रित करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। बीजिंग ने पहले भी बाजार में तनाव के समय घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने के लिए ईंधन, उर्वरक और सल्फ्यूरिक एसिड जैसे उत्पादों पर निर्यात प्रतिबंध लगाए हैं।
हीलियम को औद्योगिक पैमाने पर कृत्रिम रूप से नहीं बनाया जा सकता है और इसे मुख्य रूप से उच्च हीलियम सांद्रता वाले प्राकृतिक गैस क्षेत्रों से निकाला जाता है, जो इसे एक दुर्लभ और रणनीतिक संसाधन बनाता है।