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चिली में मापुचे संघर्ष का बदलता स्वरूप: सरकारी सख्ती के बीच नई पीढ़ी की कानूनी और पर्यावरणीय लड़ाई

चिली का सबसे बड़ा आदिवासी समूह, मापुचे, दशकों के अपने सबसे कठिन दौर का सामना कर रहा है। राष्ट्रपति होज़े एंटोनियो कास्ट की धुर-दक्षिणपंथी सरकार की कठोर कार्रवाई और प्रमुख कार्यकर्ताओं को लंबी जेल की सज़ाओं के बीच, यह आंदोलन एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहाँ युवा पीढ़ी संघर्ष के लिए नए रास्ते अपना रही है।
सरकारी कार्रवाई और बढ़ता दबाव
राष्ट्रपति कास्ट ने दक्षिणी चिली में व्यवस्था बहाल करने का वादा किया है, जिसके बाद मापुचे कार्यकर्ताओं पर दबाव काफी बढ़ गया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र के बड़े हिस्से 2022 से आपातकाल की स्थिति में हैं, जिससे सेना की तैनाती और गश्त बढ़ी है।
इस कार्रवाई के तहत कई प्रमुख मापुचे नेताओं को लंबी सज़ाएँ सुनाई गई हैं:
- सबसे प्रमुख उग्रवादी संगठन, कोऑर्डिनेडोरा अराउको-मैलेको (CAM) के संस्थापक हेक्टर लैतुल को अधिकारियों पर हमले, लकड़ी की चोरी और हिंसक भूमि कब्जे के लिए 23 साल की जेल की सज़ा दी गई है।
- हाल ही में, उनके बेटे पेलेंटारो लैतुल और चार अन्य युवा मापुचे कार्यकर्ताओं को भी वानिकी बागान पर हमले के आरोप में 14 से 16 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई।
मापुचे नेता इन मुकदमों को राजनीतिक उत्पीड़न का एक साधन बताते हैं, जिसका उद्देश्य उनके प्रतिरोध को दबाना है।
संघर्ष का ऐतिहासिक संदर्भ
Adयह संघर्ष दशकों पुराना है और इसकी जड़ें पैतृक भूमि के छिन जाने में हैं। मापुचे चिली की कुल आबादी का लगभग 9% (लगभग 16 लाख लोग) हैं। 19वीं सदी के अंत तक उनके अधिकांश क्षेत्र चिली राज्य के नियंत्रण से बाहर थे। ऑगस्टो पिनोशे की तानाशाही (1973-90) के दौरान भूमि का हस्तांतरण तेज हो गया, जब बड़े हिस्से वानिकी कंपनियों को दे दिए गए।
इसके जवाब में, CAM जैसे समूहों ने कब्जे, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़पों के माध्यम से अपनी पैतृक भूमि पर फिर से दावा करने की कोशिश की है। इन समूहों का कहना है कि वे केवल कंपनियों की संपत्ति को निशाना बनाते हैं, लेकिन पिछले 30 वर्षों में हुए संघर्षों में लगभग 40 लोग मारे गए हैं।
नई पीढ़ी की बदलती रणनीति
सरकारी सख्ती और पुराने नेताओं की गिरफ्तारी के बीच, मापुचे युवाओं की एक नई पीढ़ी संघर्ष को अलग-अलग तरीकों से आगे बढ़ा रही है। वे सीधे टकराव के बजाय कानूनी लड़ाई, विश्वविद्यालय शिक्षा और पर्यावरण अभियानों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
इसका एक प्रमुख उदाहरण हेक्टर लैतुल का सबसे छोटा बेटा, 20 वर्षीय वेफ्तुई है, जो चिली के एक शीर्ष विश्वविद्यालय में कानून का छात्र है। उसका लक्ष्य कानूनी तरीकों से मापुचे कैदियों और पैतृक भूमि की रक्षा करना है।
इसी तरह, अल्टो बायोबियो क्षेत्र में, 20 वर्षीय मिलारे सुआरेज़, जो एक युवा "माची" (आध्यात्मिक उपचारक) हैं, एक चीनी कंपनी द्वारा बनाए जा रहे पनबिजली बांध का विरोध कर रही हैं। उनका तर्क है कि यह बांध उन प्राचीन जंगलों को नष्ट कर देगा जहाँ दुर्लभ औषधीय पौधे उगते हैं, जो उनकी संस्कृति और परंपराओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह लड़ाई भूमि पुनर्प्राप्ति से आगे बढ़कर पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा तक पहुँच गई है।