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काला सागर तनाव के कारण शिकागो गेहूं वायदा साढ़े तीन साल के उच्चतम स्तर पर

Summary
रूस द्वारा यूक्रेन के बंदरगाहों पर हमले के बाद भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण शिकागो गेहूं वायदा 15 फरवरी, 2023 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस तेजी का असर मक्का और सोयाबीन की कीमतों पर भी पड़ा।
काला सागर क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच मंगलवार को शिकागो गेहूं वायदा साढ़े तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। यह उछाल उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें कहा गया है कि रूस ने यूक्रेन के बंदरगाह के बुनियादी ढांचे पर रात भर हमले किए हैं।
कीमतों में तेज उछाल
शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (CBOT) पर सबसे सक्रिय गेहूं अनुबंध 13.5 सेंट बढ़कर $7.87-1/4 प्रति बुशेल पर बंद हुआ। दिन के कारोबार के दौरान, यह $7.92-1/4 प्रति बुशेल के स्तर तक पहुंच गया था, जो 15 फरवरी, 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है।
इससे पहले, तुर्की के एक बयान के बाद कीमतों में मामूली गिरावट आई थी, जिसमें कहा गया था कि वह काला सागर के माध्यम से अनाज परिवहन पर रूस और यूक्रेन के साथ संपर्क में है। हालांकि, हमलों की खबर के बाद बाजार की धारणा तेजी से बदल गई और कीमतें बढ़ गईं।
भू-राजनीतिक तनाव मुख्य कारण
कीमतों में यह वृद्धि मुख्य रूप से रूस द्वारा काला सागर में हमलों को रोकने के प्रस्ताव को अस्वीकार करने और ओडेसा क्षेत्र में बंदरगाह के बुनियादी ढांचे पर ताजा हमले करने की खबरों से प्रेरित थी। यूक्रेनी अधिकारियों ने पुष्टि की कि रूसी हमलों ने ओडेसा के बंदरगाह और रोमानिया के साथ एक सीमा चौकी को निशाना बनाया।
Adयूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि यह हमला जानबूझकर निर्यात के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने के इरादे से किया गया था। इन घटनाओं ने वैश्विक गेहूं आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे वायदा बाजार में खरीदारी बढ़ी है।
अन्य कृषि जिंसों पर असर
गेहूं बाजार में आई तेजी का असर अन्य कृषि जिंसों पर भी देखने को मिला, क्योंकि आपूर्ति संबंधी चिंताएं पूरे कृषि क्षेत्र में फैल गईं।
- मक्का (Corn): अमेरिका में फसल की खराब पैदावार की रिपोर्ट और गेहूं बाजार से मिले समर्थन के कारण मक्का वायदा तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
- सोयाबीन (Soybeans): जैव ईंधन से संबंधित नीतिगत घोषणाओं, चीन द्वारा लगातार अमेरिकी सोयाबीन की खरीद, और अमेरिका में गर्म और शुष्क मौसम से फसल को नुकसान होने की चिंताओं के कारण सोयाबीन वायदा ढाई साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।