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काला सागर बंदरगाहों पर रुकावट से शिकागो गेहूं वायदा लगभग एक महीने के उच्चतम स्तर पर

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Aug 26, 20262 min read
काला सागर बंदरगाहों पर रुकावट से शिकागो गेहूं वायदा लगभग एक महीने के उच्चतम स्तर पर

Summary

रूस और यूक्रेन के बीच हालिया हमलों के कारण काला सागर क्षेत्र में अनाज लदान लगभग ठप हो गया है, जिससे शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड पर गेहूं वायदा की कीमतें लगभग एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।

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Background

रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव के कारण काला सागर के बंदरगाहों पर अनाज लदान परिचालन लगभग रुक गया है, जिससे शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड (CBOT) पर गेहूं वायदा की कीमतों में तेज उछाल आया है। आपूर्ति में रुकावट की चिंताओं ने कीमतों को लगभग एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है।

आपूर्ति श्रृंखला में बाधा

गेहूं की कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण काला सागर क्षेत्र में आपूर्ति संबंधी गंभीर चिंताएं हैं। रूस और यूक्रेन द्वारा एक-दूसरे पर किए गए हालिया हमलों के कारण प्रमुख बंदरगाहों पर परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

Investing.com की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के प्रमुख काला सागर निर्यात बंदरगाह, नोवोरोस्सिएस्क में तीन बड़े अनाज टर्मिनलों में से एक, NKHP ने घोषणा की है कि मरम्मत कार्यों को पूरा होने में चार महीने तक लग सकते हैं। इस घटनाक्रम ने वैश्विक गेहूं आपूर्ति को लेकर बाजार की बेचैनी बढ़ा दी है।

वायदा बाजार पर असर

बाजार की इन चिंताओं का सीधा असर वायदा कीमतों पर दिखा। CBOT पर बेंचमार्क दिसंबर गेहूं वायदा अनुबंध $7.19-1/4 प्रति बुशेल तक पहुंच गया, जो लगभग एक महीने में इसका उच्चतम स्तर है। निरंतर चार्ट पर, यह मई 2024 के बाद का भी उच्चतम मूल्य है।

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विभिन्न गेहूं अनुबंधों में भी मजबूती देखी गई:

  • CBOT दिसंबर सॉफ्ट रेड विंटर गेहूं 12-1/4 सेंट बढ़कर $7.15-1/2 प्रति बुशेल पर कारोबार कर रहा था।
  • कैनसस सिटी दिसंबर हार्ड रेड विंटर गेहूं 11-1/2 सेंट बढ़कर $7.82-1/4 प्रति बुशेल पर पहुंच गया।
  • मिनियापोलिस दिसंबर स्प्रिंग व्हीट 8-1/2 सेंट बढ़कर $7.28-1/2 प्रति बुशेल पर था।

अन्य सहायक कारक

गेहूं बाजार को मक्के की मजबूत कीमतों से भी सहारा मिला। इसके अतिरिक्त, यूक्रेन की राष्ट्रीय मौसम विज्ञान सेवा ने बताया है कि देश के अधिकांश हिस्सों में सूखे की स्थिति बनी हुई है, जो सर्दियों की फसलों की बुवाई के लिए प्रतिकूल है। यह स्थिति भविष्य में उत्पादन को लेकर एक और चिंता पैदा करती है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

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