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फेड के फैसले से पहले तेल की कीमतों में उछाल से कनाडाई डॉलर पर दबाव

Summary
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स बढ़ने और फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले निवेशकों की चिंता के कारण, तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद कनाडाई डॉलर कमजोर हुआ है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कनाडाई डॉलर मंगलवार को कमजोर हो गया, क्योंकि तेल की कीमतों में उछाल ने मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है। इस स्थिति ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स को ऊपर धकेल दिया, जिससे बुधवार को फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले कनाडाई मुद्रा पर दबाव बढ़ गया है।
मुख्य कारण
Investing.com के अनुसार, कनाडाई डॉलर, जिसे 'लूनी' भी कहा जाता है, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग C$1.3910 पर कारोबार कर रहा था। सोमवार को यह C$1.3929 के 12-दिवसीय निचले स्तर पर पहुंच गया था। यह कमजोरी ऐसे समय में आई है जब कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है, ब्रेंट क्रूड $107 प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गया है।
आम तौर पर, कनाडा एक प्रमुख तेल निर्यातक होने के कारण ऊंची कीमतों से लाभान्वित होता है। हालांकि, इस बार तेल की कीमतों में वृद्धि संयुक्त राज्य अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को हवा दे रही है। इसके चलते, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5% से ऊपर चढ़ गई है, जिससे अमेरिकी डॉलर की यील्ड का लाभ बढ़ गया है और लूनी को मिलने वाला सामान्य समर्थन कम हो गया है।
Adबाजार का नजरिया
अब निवेशकों का पूरा ध्यान फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक पर है। बाजार बुधवार को ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उच्च संभावना मानकर चल रहा है। यदि नीति निर्माता यह संकेत देते हैं कि मुद्रास्फीति लगातार बनी रह सकती है, तो इससे अमेरिकी डॉलर को और समर्थन मिल सकता है और कनाडाई मुद्रा पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके अतिरिक्त, वित्तीय बाजारों में एक व्यापक "रिस्क-ऑफ" माहौल (जोखिम से बचने की धारणा) ने भी कनाडाई डॉलर पर भार डाला है। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण पर अनिश्चितता के कारण निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ा रहे हैं। कनाडा के अगस्त के मुद्रास्फीति के आंकड़ों ने कोई नई दिशा नहीं दी, क्योंकि वे स्थिर रहे और अंतर्निहित मुद्रास्फीति में व्यापक तेजी का संकेत नहीं दिया।