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तेल की कीमतों में गिरावट और फेड के फैसले से पहले कनाडाई डॉलर कमजोर हुआ

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कनाडाई डॉलर शुक्रवार को कमजोर हो गया। इसकी मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अगले हफ्ते होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर पर निर्णय से पहले निवेशकों की सतर्कता रही।
प्रमुख आँकड़े
- लूनी (कनाडाई डॉलर का प्रचलित नाम) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.1% गिरकर 1.4095 पर आ गया, जो 70.95 अमेरिकी सेंट के बराबर है।
- कारोबार के दौरान यह 14 जुलाई के बाद अपने सबसे कमजोर स्तर 1.4114 पर पहुँच गया था।
- साप्ताहिक आधार पर, कनाडाई डॉलर में 0.5% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे इसकी लगातार दो हफ्तों की बढ़त का सिलसिला समाप्त हो गया।
गिरावट के पीछे के कारक
कनाडाई डॉलर के कमजोर होने के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं। कनाडा के प्रमुख निर्यातों में से एक, तेल की कीमत 3.8% गिरकर $88.72 प्रति बैरल पर आ गई। हालांकि, लाल सागर में ऊर्जा प्रवाह में व्यवधान और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण साप्ताहिक आधार पर तेल की कीमतों में बढ़त की उम्मीद है।
Adइसके अलावा, निवेशक अगले हफ्ते होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक का इंतजार कर रहे हैं। बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने वैश्विक मुद्रास्फीति की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे यह उम्मीद बढ़ी है कि फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर अमेरिकी डॉलर को मजबूत करती हैं। इस हफ्ते की गिरावट में अमेरिका द्वारा कनाडाई वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाने की धमकियों का भी योगदान रहा।
बाजार का नजरिया
मोनेक्स यूरोप के रणनीतिकारों ने कहा है कि फेड के फैसले और मई के जीडीपी आंकड़ों से पहले लूनी की चाल कच्चे तेल की कीमतों, जोखिम की धारणा और व्यापार से जुड़ी खबरों पर निर्भर करेगी। बाजार के आंकड़ों से पता चलता है कि सटोरियों (speculators) ने प्रमुख मुद्राओं में कनाडाई डॉलर पर अपनी मंदी की पोजीशन (bearish positions) को उच्चतम स्तर तक बढ़ा दिया है, जो मुद्रा पर अल्पकालिक दबाव का संकेत देता है।