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अमेरिकी महंगाई और व्यापारिक तनाव के कारण कनाडाई डॉलर कमजोर

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कनाडाई डॉलर बुधवार को कमजोर हो गया। इसकी मुख्य वजह अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव और उम्मीद से अधिक अमेरिकी महंगाई के आंकड़े हैं, जिसने अमेरिकी मुद्रा को मजबूती दी है।
बाजार का प्रदर्शन
USD/CAD मुद्रा जोड़ी लगभग 0.27% बढ़कर C$1.3876 पर कारोबार कर रही थी, जो दिन के दौरान C$1.3893 के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। इससे पहले, कनाडाई डॉलर (जिसे "लूनी" भी कहा जाता है) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले C$1.3892 तक गिर गया, जो 19 अगस्त के बाद का सबसे कमजोर स्तर है। इसका मतलब है कि एक कनाडाई डॉलर की कीमत लगभग 72.07 अमेरिकी सेंट थी।
गिरावट के प्रमुख कारण
कनाडाई मुद्रा पर दबाव दो प्रमुख कारकों से आया है:
अमेरिका में महंगाई के आंकड़े
Adअमेरिका में जारी ताजा आंकड़ों से पता चला है कि व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) महंगाई दर जुलाई में सालाना 3.7% पर बनी रही, जो 3.6% के अनुमान से थोड़ी अधिक थी। इन आंकड़ों से यह संभावना बढ़ गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरें बढ़ा सकता है, जिससे अमेरिकी डॉलर को अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले समर्थन मिला है। वायदा बाजारों ने सितंबर में दर वृद्धि की संभावना बढ़ा दी है।
बढ़ता व्यापार विवाद
ओटावा और वाशिंगटन के बीच व्यापार विवाद बढ़ने से भी कनाडाई डॉलर पर दबाव बना है। अमेरिका द्वारा कनाडाई आयातों पर 50% टैरिफ लगाने के जवाब में, कनाडा ने लगभग C$27.6 बिलियन ($20 बिलियन) के अमेरिकी सामानों पर जवाबी टैरिफ की घोषणा की है। ये उपाय 8 सितंबर से प्रभावी होने वाले हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ गई है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है
कनाडाई डॉलर के लिए, अमेरिका में उच्च ब्याज दरों की उम्मीद और व्यापारिक अनिश्चितता एक "दोहरी प्रतिकूल स्थिति" (double headwind) प्रस्तुत करती है। इससे मुद्रा पर आगे भी दबाव बना रह सकता है। निवेशक तेल की कीमतों पर भी करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि कनाडा एक प्रमुख ऊर्जा निर्यातक है और इसकी मुद्रा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील होती है।