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ट्रंप की टैरिफ धमकी के बाद, कनाडा और अमेरिका व्यापार वार्ता तेज करेंगे: पीएम कार्नी

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Jul 21, 20262 min read
ट्रंप की टैरिफ धमकी के बाद, कनाडा और अमेरिका व्यापार वार्ता तेज करेंगे: पीएम कार्नी

Summary

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात की है और दोनों नेता आने वाले हफ्तों में व्यापार वार्ता को तेज करने पर सहमत हुए हैं। यह बयान अमेरिका द्वारा हाल ही में दी गई टैरिफ की धमकी के बाद आया है।

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कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन पर बात की है, जिसमें दोनों नेता व्यापार वार्ता में तेजी लाने पर सहमत हुए हैं। यह प्रगति अमेरिका द्वारा कनाडा के खिलाफ हाल ही में टैरिफ लगाने की धमकी दिए जाने के ठीक एक दिन बाद हुई है।

बातचीत का विवरण

रॉयटर्स के अनुसार, ओटावा में पत्रकारों से बात करते हुए कार्नी ने इस बातचीत की पुष्टि की। उन्होंने कहा, "हम आने वाले हफ्तों में बातचीत को तेज करने पर सहमत हुए हैं, और मेरी टीम और मैं ऐसा करने के लिए उत्सुक हैं।"

यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों नेता मौजूदा व्यापारिक मुद्दों को हल करने के लिए उच्च-स्तरीय चर्चा फिर से शुरू करने पर सहमत हुए हैं।

टैरिफ विवाद और कनाडा का रुख

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यह वार्तालाप राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कनाडा पर नए टैरिफ लगाने की नवीनतम धमकी की पृष्ठभूमि में हुआ है। इस खतरे के जवाब में, प्रधानमंत्री कार्नी ने स्पष्ट किया कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी धमकी पर आगे बढ़ता है तो कनाडा जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है।

कार्नी ने जोर देकर कहा कि अगर अमेरिका नए शुल्क लगाता है तो सभी विकल्प मेज पर हैं। यह कनाडा के मजबूत रुख को दर्शाता है और संकेत देता है कि वह अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जवाबी टैरिफ जैसे कदम उठा सकता है।

बाजार के लिए मायने

अमेरिका और कनाडा के बीच किसी भी तरह का व्यापार विवाद निवेशकों और बाजारों के लिए अनिश्चितता पैदा करता है, क्योंकि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं गहराई से जुड़ी हुई हैं। वार्ता को तेज करने का समझौता तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है, जिससे सीमा पार व्यापार करने वाली कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, जब तक कोई ठोस समाधान नहीं हो जाता, तब तक टैरिफ का खतरा बाजार की धारणा को प्रभावित करता रहेगा।

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