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बैंक ऑफ अमेरिका का अनुमान: तीसरी तिमाही के अंत तक यूरो/डॉलर में कमजोरी जारी रहेगी

बैंक ऑफ अमेरिका का अनुमान है कि मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के कारण यूरो/डॉलर विनिमय दर पर तीसरी तिमाही के अंत तक दबाव बना रहेगा। बैंक ने यह भी कहा कि अल्पावधि में बढ़ती तेल की कीमतें भी डॉलर को अतिरिक्त समर्थन प्रदान करेंगी।
तीसरी तिमाही के लिए डॉलर में मजबूती का अनुमान
बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के विश्लेषकों ने अपने नवीनतम आउटलुक में कहा है कि कई कारक मिलकर निकट भविष्य में अमेरिकी डॉलर को यूरो के मुकाबले मजबूत करेंगे। इस दृष्टिकोण के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- मजबूत अमेरिकी आर्थिक डेटा: अमेरिका से आने वाले सकारात्मक आर्थिक संकेतक डॉलर को मजबूती दे रहे हैं।
- फेडरल रिजर्व का आक्रामक रुख: अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आक्रामक नीति (hawkish stance) डॉलर के लिए एक प्रमुख सहायक कारक है।
- तेल की बढ़ती कीमतें: अल्पावधि में, तेल की ऊंची कीमतें भी डॉलर को समर्थन देंगी।
Q3 के बाद संभावित बदलाव
हालांकि, BofA का मानना है कि डॉलर की यह मजबूती स्थायी नहीं हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीसरी तिमाही के समाप्त होने के बाद डॉलर में नरमी आ सकती है।
Adइसका कारण यह है कि बाजार फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में की जाने वाली ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को पूरी तरह से पचा लेगा (fully price in)। इसके अतिरिक्त, बैंक को उम्मीद है कि तेल की कीमतों में भी नरमी आएगी, जिससे डॉलर पर से कुछ दबाव कम हो जाएगा।
बाजार के लिए इसका क्या मतलब है
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि बैंक ऑफ अमेरिका ने अपनी रिपोर्ट में यूरो/डॉलर के लिए कोई विशिष्ट संख्यात्मक लक्ष्य (specific numerical target) प्रदान नहीं किया है।
यूरो/डॉलर दुनिया के विदेशी मुद्रा बाजार में सबसे अधिक कारोबार वाली मुद्रा जोड़ियों में से एक है। यह पूर्वानुमान बताता है कि निवेशक आने वाले महीनों में इस जोड़ी में निरंतर अस्थिरता की उम्मीद कर सकते हैं, जिसमें अल्पावधि में डॉलर के पक्ष में झुकाव देखा जा सकता है।