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वॉरेन बफेट का बड़ा फैसला: एपस्टीन विवाद के बाद गेट्स फाउंडेशन को दान देना बंद किया

Summary
दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट ने बिल गेट्स के जेफरी एपस्टीन के साथ संबंधों के खुलासे के बाद गेट्स फाउंडेशन को अपना दान देना बंद कर दिया है। अब यह अरबों डॉलर की राशि उनके पारिवारिक फाउंडेशनों को दी जाएगी।
दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट ने बिल गेट्स के दिवंगत यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ संबंधों के खुलासे के बाद, गेट्स फाउंडेशन को दान देना बंद कर दिया है। रॉयटर्स के अनुसार, बफेट ने अपनी परोपकारी रणनीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए अब अपने पारिवारिक फाउंडेशनों को अरबों डॉलर का दान दिया है।
पारिवारिक फाउंडेशनों पर नया फोकस
मंगलवार को की गई घोषणा के अनुसार, बफेट ने बर्कशायर हैथवे के लगभग $6 अरब मूल्य के 1.2 करोड़ क्लास बी शेयर चार पारिवारिक फाउंडेशनों को दान किए हैं। इन फाउंडेशनों का संचालन उनके बच्चे सुसी, हॉवर्ड और पीटर बफेट करते हैं।
95 वर्षीय बफेट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह 31 दिसंबर, 2034 तक अपने शेष बर्कशायर शेयरों को भी "किसी न किसी तरह" इन्हीं चार फाउंडेशनों को दान कर देंगे। यह कदम उनकी दान रणनीति में एक महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक बदलाव का संकेत देता है।
गेट्स फाउंडेशन से दूरी और एपस्टीन विवाद
इस घोषणा में विशेष रूप से गेट्स फाउंडेशन का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिसे निवेशक और विश्लेषक एक महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं। यह कदम माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स और सजायाफ्ता यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के बीच बातचीत के खुलासे के बाद आया है।
Adबिल गेट्स ने जून में कांग्रेस के सदस्यों को बताया था कि जब वह अपने परोपकारी फाउंडेशन के लिए धन जुटाने हेतु एपस्टीन से जुड़े थे, तब उन्हें एपस्टीन के अपराधों की गंभीरता का "पूरी तरह से अंदाजा नहीं था"। गेट्स ने यह भी गवाही दी कि उन्होंने एपस्टीन द्वारा कोई भी आपराधिक आचरण कभी नहीं देखा।
एक ऐतिहासिक प्रतिबद्धता का अंत
बफेट ने 2006 में एक अटल प्रतिज्ञा की थी कि वह जीवन भर गेट्स फाउंडेशन को अपने शेयर दान करेंगे। इस फैसले से उस ऐतिहासिक प्रतिबद्धता का अंत हो गया है।
- 2006 से अब तक, गेट्स फाउंडेशन को बर्कशायर हैथवे के $47 अरब से अधिक मूल्य के शेयर प्राप्त हो चुके हैं।
- अकेले पिछले साल ही बफेट का दान $4.5 अरब से अधिक का था, जो इस फैसले के वित्तीय प्रभाव को रेखांकित करता है।
यह बदलाव दुनिया के सबसे बड़े परोपकारी गठबंधनों में से एक की समाप्ति का प्रतीक है और यह सवाल उठाता है कि वैश्विक परोपकार के क्षेत्र में भविष्य में पूंजी का प्रवाह किस तरह होगा।