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तेल की कीमतों में उछाल से अमेरिकी प्राकृतिक गैस वायदा मजबूत

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Aug 18, 20262 min read
तेल की कीमतों में उछाल से अमेरिकी प्राकृतिक गैस वायदा मजबूत

Summary

ईरान में भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के सहारे अमेरिकी प्राकृतिक गैस वायदा में मंगलवार को उछाल आया। हालांकि, रिकॉर्ड उत्पादन और कमजोर मांग के अनुमानों ने इस बढ़त को सीमित कर दिया।

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Background

कच्चे तेल की कीमतों में आई मजबूती के सहारे अमेरिकी प्राकृतिक गैस वायदा में मंगलवार को पिछले सत्र के निचले स्तर से वापसी हुई। यह उछाल मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंताओं से प्रेरित था।

बाजार के आंकड़े और प्रमुख चालक

न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (NYMEX) पर, सितंबर डिलीवरी के लिए प्राकृतिक गैस वायदा 8.6 सेंट या 3.2% बढ़कर $2.78 प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (mmBtu) पर बंद हुआ। Investing.com के अनुसार, यह अनुबंध सोमवार को 7 अगस्त, 2023 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था।

इस तेजी का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि थी, जहां ब्रेंट क्रूड का भाव $91 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। प्राकृतिक गैस की कीमतें अक्सर व्यापक ऊर्जा बाजार के रुझानों का अनुसरण करती हैं।

भू-राजनीतिक तनाव का असर

तेल की कीमतों में यह उछाल ईरान युद्ध में युद्धविराम समझौते की संभावना कम होने के बाद आया। ईरान द्वारा अधिक आक्रामक रुख अपनाने और अमेरिका द्वारा युद्धविराम को बढ़ाने से इनकार करने के बाद बाजार में ऊर्जा आपूर्ति में निरंतर बाधा की आशंका बढ़ गई है।

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रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के मुख्य वार्ताकार ने कहा है कि जब तक अमेरिका एक अस्थायी समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। यह एक प्रमुख वैश्विक ऊर्जा मार्ग है, और इसके बंद होने की आशंका ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

रिकॉर्ड उत्पादन से बढ़त सीमित

तेल की कीमतों से मिले समर्थन के बावजूद, प्राकृतिक गैस में बड़ी तेजी पर लगाम लगी रही। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर हो रहा गैस उत्पादन और आने वाले समय में मांग कमजोर रहने की उम्मीदें कीमतों पर दबाव बनाए हुए हैं।

ये कारक गैस की कीमतों में किसी भी महत्वपूर्ण उछाल को सीमित कर रहे हैं, भले ही व्यापक ऊर्जा बाजार में तेजी का रुख हो। निवेशकों की नजर अब आपूर्ति और मांग के इन परस्पर विरोधी संकेतों पर बनी रहेगी।

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