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चीन की तेल मांग में 2026 में 8.9% की गिरावट का अनुमान: सिनोपेक रिपोर्ट

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Sep 10, 20262 min read
चीन की तेल मांग में 2026 में 8.9% की गिरावट का अनुमान: सिनोपेक रिपोर्ट

Summary

सिनोपेक के एक शोध संस्थान के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण 2026 में चीन की तेल मांग में 8.9% की गिरावट आने की उम्मीद है। यह वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

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चीन पेट्रोकेमिकल कॉर्प (सिनोपेक) के इकोनॉमिक्स एंड टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में चीन की तेल मांग में साल-दर-साल 8.9% की भारी गिरावट का अनुमान है। इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) का तेजी से बढ़ता चलन जिम्मेदार है।

मांग में गिरावट के प्रमुख कारण

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक चीन में तेल की मांग का शिखर 2025 में ही आ चुका है। अब देश ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ रहा है, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की तेज गति इस बदलाव का एक प्रमुख चालक है, जिससे परिवहन क्षेत्र में पारंपरिक ईंधन की खपत घट रही है।

विस्तृत पूर्वानुमान

सिनोपेक के संस्थान ने मांग में गिरावट को लेकर कुछ विशिष्ट आंकड़े भी जारी किए हैं:

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  • कुल गिरावट: 2026 में तेल की मांग में प्रतिदिन 600,000 बैरल की कमी आएगी।
  • गैसोलीन: गैसोलीन की मांग में साल-दर-साल 8.7% की गिरावट का अनुमान है।
  • डीजल: डीजल की मांग में सबसे अधिक 11.4% की गिरावट की आशंका है।
  • विमानन ईंधन: इसके विपरीत, विमानन ईंधन की मांग में 1.3% की मामूली वृद्धि होने की उम्मीद है, जो हवाई यात्रा में सुधार का संकेत देता है।

दीर्घकालिक दृष्टिकोण और रिफाइनिंग पर असर

यह रिपोर्ट चीन के ऊर्जा परिदृश्य में एक दीर्घकालिक संरचनात्मक बदलाव की ओर इशारा करती है। संस्थान का अनुमान है कि 2030 तक चीन की तेल मांग 750 मिलियन टन से नीचे आ जाएगी और 2060 तक यह घटकर लगभग 300 मिलियन टन रह जाएगी।

मांग में इस कमी का असर देश के रिफाइनिंग क्षेत्र पर भी दिख रहा है। सिनोपेक के आंकड़ों के अनुसार, दूसरी और तीसरी तिमाही में घरेलू कच्चे तेल का प्रसंस्करण (processing) 5.4% घटकर 697 मिलियन टन रह गया, जिससे रिफाइनरियों की परिचालन दर घटकर 73.2% पर आ गई। हालांकि, संस्थान ने यह भी अनुमान लगाया है कि 2030 तक चीन की औद्योगिक गैस की मांग में 50 बिलियन क्यूबिक मीटर की वृद्धि होगी, जो ऊर्जा मिश्रण में बदलाव को दर्शाता है।

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