Story
रूस और म्यांमार ने ऊर्जा सौदों पर की चर्चा, पुतिन ने तेल रिफाइनरी और LNG परियोजनाओं का उल्लेख किया

Summary
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और म्यांमार के नेता मिन आंग ह्लाइंग ने मॉस्को में मुलाकात की, जिसमें तेल रिफाइनरी, हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और LNG आपूर्ति सहित ऊर्जा सहयोग को गहरा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को मॉस्को में म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के साथ बातचीत की, जिसमें दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक में एक नई तेल रिफाइनरी के निर्माण और रूसी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
ऊर्जा सौदों पर विस्तृत चर्चा
बैठक के बाद अपने बयानों में, राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि दोनों देश कई क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं, लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण अवसर मौजूद हैं। उन्होंने कई संभावित परियोजनाओं पर प्रकाश डाला, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत कर सकती हैं।
चर्चा के प्रमुख विषयों में शामिल हैं:
- म्यांमार में एक तेल रिफाइनरी का निर्माण।
- म्यांमार के महाद्वीपीय शेल्फ सहित हाइड्रोकार्बन उत्पादन और अन्वेषण।
- म्यांमार को रूसी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति, जिसमें अन्य देशों को पारगमन की भी संभावना है।
ऊर्जा के अलावा, दोनों नेताओं ने रक्षा और अंतरिक्ष अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग पर बात की।
Adरणनीतिक महत्व और पृष्ठभूमि
यह यात्रा मिन आंग ह्लाइंग की अप्रैल में राष्ट्रपति बनने के बाद किसी भी गैर-पड़ोसी देश की पहली यात्रा है। इसे पश्चिमी देशों के दबाव का सामना कर रहे दोनों देशों के बीच गहरे होते संबंधों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। रूस और चीन, म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समर्थकों में से हैं।
मिन आंग ह्लाइंग, जिन पर कई पश्चिमी प्रतिबंध लगे हैं, 2021 में सेना द्वारा सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद से अंतरराष्ट्रीय वैधता की तलाश में हैं। यह बैठक रूस के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह एशिया में अपने आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव का विस्तार करने के अवसरों की तलाश में है।
पिछला सहयोग
यह दोनों नेताओं के बीच पहली मुलाकात नहीं है। पिछले साल क्रेमलिन में हुई बातचीत के दौरान, रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा निगम द्वारा म्यांमार में एक छोटे पैमाने के परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह मौजूदा ऊर्जा वार्ता उसी सहयोग की नींव पर आधारित है।