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पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए अमेरिका से 10 अरब डॉलर की सुविधा मांगी: रॉयटर्स

Summary
रॉयटर्स के अनुसार, पाकिस्तान ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने और रुपये पर दबाव कम करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका से 10 अरब डॉलर की द्विपक्षीय विनिमय स्थिरीकरण सहायता सुविधा का अनुरोध किया है।
पाकिस्तान ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और रुपये पर दबाव कम करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका से $10 बिलियन की विनिमय स्थिरीकरण सुविधा (exchange stabilization facility) का अनुरोध किया है। रॉयटर्स ने मंगलवार को इस मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के हवाले से यह खबर दी।
अनुरोध का विवरण
रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद ने अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट से $10 बिलियन की द्विपक्षीय विनिमय स्थिरीकरण सहायता सुविधा (Bilateral Exchange Stabilization Support Facility) की मांग की है। इस सुविधा की परिपक्वता अवधि पांच साल तक की होगी और इसका उद्देश्य पाकिस्तान के घटते विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा देना है।
यह कदम ईरान युद्ध पर बातचीत में मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका के बाद आया है, जिससे उसकी राजनयिक स्थिति में वृद्धि हुई है। यदि यह सुविधा स्वीकृत हो जाती है, तो इससे पाकिस्तानी रुपये पर दबाव कम होगा और देश की बहुपक्षीय वित्तपोषण पर निर्भरता घटेगी।
आर्थिक चुनौतियाँ और आईएमएफ कार्यक्रम
पाकिस्तान वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कार्यक्रम के तहत कड़ी राजकोषीय और मौद्रिक नीतियां लागू कर रहा है। देश 2023 में $3 बिलियन के आईएमएफ स्टैंडबाय सौदे की मदद से डिफॉल्ट होने से बचा था और बाद में उसे $7 बिलियन की एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) भी मिली थी।
Adइसके अलावा, पाकिस्तान ने जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए $1.3 बिलियन का एक अलग ऋण भी प्राप्त किया था। इन प्रयासों के बावजूद, देश का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी काफी हद तक इन स्रोतों पर निर्भर है:
- चीन और सऊदी अरब से मिलने वाली आधिकारिक वित्तीय सहायता और जमा।
- द्विपक्षीय समर्थन और आईएमएफ से मिलने वाली किश्तों पर निर्भरता।
यह निर्भरता इस्लामाबाद को द्विपक्षीय समर्थन में बदलाव और आईएमएफ संवितरण में देरी के प्रति संवेदनशील बनाती है। उदाहरण के लिए, अप्रैल में पाकिस्तान ने संयुक्त अरब अमीरात को अपने भंडार का लगभग पांचवां हिस्सा, यानी करीब $3.5 बिलियन का भुगतान किया था, जबकि सऊदी अरब ने $3 बिलियन का नया समर्थन प्रदान किया था।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है
अमेरिका से इस वित्तीय सुविधा के मिलने से पाकिस्तान की बाहरी वित्तीय स्थिति में काफी स्थिरता आ सकती है। निवेशकों के लिए, यह एक सकारात्मक संकेत होगा क्योंकि यह तत्काल डिफ़ॉल्ट जोखिम को कम करेगा और मुद्रा में स्थिरता लाएगा। यह पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में बाहरी झटकों को सहने की क्षमता को भी बढ़ाएगा, जिससे देश की क्रेडिट प्रोफाइल में सुधार हो सकता है।