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अमेरिका द्वारा ईरान पर नए प्रतिबंधों की तैयारी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 1% की गिरावट

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Aug 24, 20262 min read
अमेरिका द्वारा ईरान पर नए प्रतिबंधों की तैयारी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 1% की गिरावट

Summary

पिछले दो हफ्तों की मजबूत तेजी के बाद मुनाफावसूली और अमेरिका द्वारा ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की संभावना के बीच सोमवार को तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

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Background

सोमवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आई, जो पिछले दो हफ्तों की मजबूत बढ़त के बाद संभावित मुनाफावसूली का संकेत है। यह गिरावट ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ईरान पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति में और बाधा आने की आशंका है।

बाज़ार में कीमतों की चाल

Investing.com के आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड वायदा 0.9% गिरकर $93.51 प्रति बैरल पर आ गया। यह गिरावट पिछले दो हफ्तों में 5% से अधिक की तेजी के बाद आई है। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड वायदा 1.1% गिरकर $86.08 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

अमेरिकी प्रतिबंध और भू-राजनीतिक तनाव

अमेरिका ने सोमवार को ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों के दौर की घोषणा करने की बात कही है। फाइनेंशियल टाइम्स के लिए एक लेख में, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान के लिए एक "आर्थिक डी-डे" आ रहा है। ये टिप्पणियां होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते गतिरोध के बीच आई हैं।

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इसके जवाब में, ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेज़ाई ने चेतावनी दी है कि अगर यह आर्थिक युद्ध जारी रहा तो होर्मुज या "फारस की खाड़ी में कहीं से भी तेल की एक भी बूंद का निर्यात नहीं होने दिया जाएगा।"

आपूर्ति पर असर और निवेशकों के लिए संकेत

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु है, क्योंकि संघर्ष से पहले दुनिया का लगभग 20% तेल यहीं से गुजरता था। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण इस मार्ग से तेल का प्रवाह पहले ही धीमा हो गया है, और नए प्रतिबंधों से आपूर्ति में और कमी आने की उम्मीद है।

इसके अलावा, यह संघर्ष अन्य क्षेत्रों में भी फैलने का खतरा पैदा कर रहा है। यमन के ईरान समर्थित हूती समूह द्वारा सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा ने लाल सागर में भी आपूर्ति संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है। निवेशकों के लिए, यह बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता तेल बाज़ार में अधिक अस्थिरता का संकेत देती है।

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