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एक मज़बूत सप्ताह के बाद तेल की कीमतों में नरमी; ईरान को लेकर चिंताएँ बरकरार

Summary
पिछले सप्ताह की मज़बूत बढ़त के बाद एशियाई कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में मामूली गिरावट आई, लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव और आपूर्ति संबंधी चिंताओं ने गिरावट को सीमित कर दिया।
पिछले सप्ताह की शानदार तेजी के बाद सोमवार को एशियाई कारोबार में तेल की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण कीमतों में बड़ी गिरावट नहीं देखी गई, जिसने बाज़ार को समर्थन देना जारी रखा है।
बाज़ार के ताज़ा आँकड़े
एशियाई व्यापार सत्र के दौरान, वैश्विक बेंचमार्क माने जाने वाले ब्रेंट ऑयल वायदा की कीमत 0.16% गिरकर $88.42 प्रति बैरल पर आ गई। इसी तरह, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड वायदा 0.2% की गिरावट के साथ $81.31 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
यह मामूली गिरावट पिछले सप्ताह की एक महत्वपूर्ण बढ़त के बाद आई है, जब ब्रेंट क्रूड में 5% से अधिक की वृद्धि हुई थी। यह उछाल मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण था।
भू-राजनीतिक तनाव से कीमतों को सहारा
तेल की कीमतों में गिरावट सीमित है क्योंकि निवेशक ईरान से जुड़े घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं। हाल के सप्ताहों में निम्नलिखित प्रमुख कारक चिंता का विषय बने हुए हैं:
Ad- होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान: ईरान द्वारा क्षेत्र में टैंकरों पर कथित हमलों के बाद एक प्रमुख वैश्विक तेल पारगमन मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग धीमी हो गई है।
- लाल सागर में हमले: यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा बाब अल-मन्देब जलडमरूमध्य में जहाजों पर लगातार हमले किए जा रहे हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए एक और खतरा पैदा हो गया है।
- अमेरिका-ईरान तनाव: अमेरिका द्वारा तेहरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी बनाए रखने और ईरान द्वारा ऊर्जा के बुनियादी ढांचे पर हमलों से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है, जिससे आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना हुआ है।
आपूर्ति की चिंताएँ बनाम मांग का पूर्वानुमान
बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं वैश्विक तेल मांग के कमजोर पूर्वानुमानों पर भारी पड़ रही हैं। पिछले हफ्ते, पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) दोनों ने 2026 के लिए अपने मांग पूर्वानुमानों में कटौती की थी।
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव बना रहता है, तब तक आपूर्ति संबंधी जोखिम बाजार का प्राथमिक चालक बने रहेंगे। यह स्थिति तेल की कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकती है, भले ही मांग की तस्वीर कमजोर हो।