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आपूर्ति में कमी के कारण उत्तर-पश्चिमी यूरोपीय गैसोलीन मार्जिन में उछाल

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Aug 19, 20261 min read
आपूर्ति में कमी के कारण उत्तर-पश्चिमी यूरोपीय गैसोलीन मार्जिन में उछाल
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उत्तर-पश्चिमी यूरोप में गैसोलीन रिफाइनिंग मार्जिन बुधवार को 53 सेंट बढ़कर $39.78 प्रति बैरल हो गया। यह वृद्धि क्षेत्र में आपूर्ति के तंग होने के संकेतों के बीच हुई है, जो वैश्विक ईंधन बाजारों पर व्यापक दबाव को दर्शाता है।

बाजार की गतिविधियां

ट्रेडिंग गतिविधि में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो बाजार में सक्रियता का संकेत है। कुल मिलाकर, 16,000 मीट्रिक टन E5 गैसोलीन बार्ज का कारोबार हुआ।

  • इस सौदे में ट्रैफिगुरा (Trafigura) और इक्विनोर (Equinor) विक्रेता थे।
  • खरीदारों में TOTSA, वारो (Varo), एमबी एनर्जी (MB Energy) और पेट्रोइनियोस (Petroineos) शामिल थे।

इसके अतिरिक्त, 8,000 टन E10 गैसोलीन बार्ज का भी कारोबार हुआ, जिसमें एक्सॉन (Exxon), सहारा (Sahara) और शेल (Shell) ने वारो और ट्रैफिगुरा को बिक्री की।

आपूर्ति संबंधी चिंताएं और रूस का प्रभाव

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बाजार में यह सख्ती ऐसे समय में आई है जब रूस में ईंधन की कमी की खबरें आ रही हैं। प्रारंभिक शिपिंग डेटा और व्यापार स्रोतों के अनुसार, रूस इस महीने एशिया में शिप-टू-शिप ट्रांसफर के माध्यम से लगभग 2,70,000 मीट्रिक टन रिफाइंड ईंधन का आयात कर रहा है।

यह आयात रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों के कारण हुई ईंधन की कमी को दूर करने के प्रयास का हिस्सा है। मॉस्को में फ्यूल स्टेशनों द्वारा गैसोलीन की खरीद पर फिर से सीमाएं लगाने की खबरें भी आई हैं, जो उच्च मौसमी मांग और उत्पादन बाधाओं के दोहरे दबाव को उजागर करती हैं।

वैश्विक संदर्भ

ईरान और यूक्रेन में संघर्षों के कारण वैश्विक ईंधन आपूर्ति में आए व्यवधानों का भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के तेल रिफाइनरों को फायदा हो रहा है। इन घटनाओं ने कीमतों को ऊपर धकेल दिया है और उत्तरी गोलार्ध में गर्मियों के ड्राइविंग सीजन के दौरान आयातकों से मजबूत मांग पैदा की है, जिससे रिफाइनिंग मार्जिन को समर्थन मिला है।

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