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लेबनान पर इजरायली हमले में 13 की मौत, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से बाज़ार चिंतित

Summary
दक्षिणी लेबनान के एक कस्बे पर इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जिससे एक बड़े सैन्य अभियान की आशंका बढ़ गई है। इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता का खतरा पैदा हो गया है।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के एक कस्बे पर हुए इजरायली हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जिनमें छह बच्चे भी शामिल हैं। यह हाल के हफ्तों में हुए सबसे घातक हमलों में से एक है, जिससे जून में हुए संघर्षविराम के बावजूद क्षेत्र में एक बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
हमले का विवरण
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि कफ़र रुम्मन कस्बे में एक रिहायशी इमारत पर हुए हमले में 12 लोग मारे गए, जिनमें छह बच्चे और तीन महिलाएँ शामिल थीं। रॉयटर्स के अनुसार, यह हमला तब हुआ जब बच्चे स्कूल के लिए तैयार हो रहे थे। मंत्रालय के मुताबिक, एक अलग ड्रोन हमले में एक नागरिक वाहन को निशाना बनाया गया, जिसमें एक स्वास्थ्यकर्मी की मौत हो गई।
इसके जवाब में, इजरायली सेना ने कहा कि उसने उस इलाके में हथियार ले जाते देखे गए लोगों पर हमला किया था। सेना ने यह भी कहा कि उसने "गैर-शामिल व्यक्तियों" को नुकसान से बचाने के लिए सटीक हथियारों का इस्तेमाल करने जैसे कदम उठाए थे और वह नागरिक हताहतों की रिपोर्ट की समीक्षा कर रही है।
बढ़ता तनाव और पृष्ठभूमि
यह हमला इजरायल और लेबनानी सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुआ है। लेबनानी सुरक्षा अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि वे आने वाले हफ्तों में दक्षिण में तनाव और बढ़ने की आशंका जता रहे हैं। हाल के दिनों में हमलों में तेज़ी आई है:
Ad- रविवार को, पास के तीन कस्बों पर हुए इजरायली हमलों में कम से कम 11 लोग मारे गए थे।
- शुक्रवार को हुए हमलों में एक महिला सहित चार अन्य लोगों की जान गई थी।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मार्च में संघर्ष शुरू होने के बाद से लेबनान में इजरायली हमलों में 4,300 से अधिक लोग मारे गए हैं। मंत्रालय हताहतों में नागरिकों और लड़ाकों के बीच अंतर नहीं करता है।
बाज़ार पर संभावित प्रभाव
मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक अस्थिरता का बढ़ना वैश्विक वित्तीय बाजारों, विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम है। लेबनान में संघर्ष का बढ़ना, जिसमें इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह शामिल हैं, एक व्यापक क्षेत्रीय संकट को जन्म दे सकता है जो तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
निवेशक इस स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं क्योंकि किसी भी बड़े सैन्य टकराव से प्रमुख शिपिंग लेन बाधित हो सकती हैं या ऊर्जा बुनियादी ढांचे को खतरा हो सकता है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति में कमी आ सकती है। इस तरह की घटनाओं से आमतौर पर बाज़ार में 'रिस्क-ऑफ' धारणा बढ़ती है, जिससे निवेशक इक्विटी जैसे जोखिम भरे निवेशों से हटकर सोना और अमेरिकी डॉलर जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर जाते हैं।