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दक्षिणी लेबनान पर इजरायली हवाई हमले में 11 की मौत, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा

Summary
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, दक्षिणी लेबनान के एक कस्बे पर इजरायली हवाई हमलों में दो बच्चों और दो चिकित्साकर्मियों सहित कम से कम 11 लोग मारे गए। यह घटना जून के संघर्ष विराम के बावजूद क्षेत्र में बढ़ते तनाव को दर्शाती है, जिसका असर ऊर्जा बाज़ारों पर पड़ सकता है।
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी ने बताया कि सोमवार तड़के दक्षिणी लेबनानी कस्बे पर हुए इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता बढ़ने की आशंका है।
हमले का विवरण
लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार, यह हमला दो अलग-अलग घटनाओं में हुआ:
- पहला हमला आधी रात के ठीक बाद हुआ, जब इजरायली युद्धक विमानों ने कफ़र रूम्मन कस्बे में एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाया। इस हमले में दो बच्चों सहित 9 लोगों की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए।
- एक अन्य घटना में, एक इजरायली ड्रोन ने कस्बे में एक नागरिक वाहन पर हमला किया, जिसमें कार के अंदर मौजूद दो चिकित्साकर्मियों की मौत हो गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली सेना ने इन हमलों से पहले ऑनलाइन निकासी की कोई चेतावनी जारी नहीं की थी। रॉयटर्स द्वारा पूछे गए सवालों पर इजरायली सेना ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
संघर्ष की पृष्ठभूमि और बढ़ता तनाव
Adयह हमला जून में हुए संघर्ष विराम के बावजूद हुआ है, जिसका उद्देश्य इजरायली सेना और लेबनानी सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई को रोकना था। हाल के दिनों में इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर अपनी बमबारी तेज कर दी है। रविवार को भी इजरायली हमलों में कम से कम सात लोग मारे गए थे।
यह संघर्ष 2 मार्च को हिजबुल्लाह द्वारा इजरायल पर रॉकेट दागे जाने के बाद शुरू हुआ था, जिसके बाद इजरायल ने हवाई और जमीनी हमला किया। तब से लेकर अब तक लेबनान में इजरायली हमलों में 4,300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
बाज़ारों पर संभावित प्रभाव
मध्य पूर्व में किसी भी तरह का सैन्य तनाव बढ़ने का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर पड़ता है। लेबनान और इजरायल के बीच संघर्ष बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान की आशंका पैदा होती है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। निवेशक इस क्षेत्र की स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि तनाव बढ़ने से वैश्विक इक्विटी और कमोडिटी बाज़ारों में अस्थिरता (volatility) बढ़ सकती है।