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इराक के तेल निर्यात में अगस्त में सुधार, भारी छूट और ईरानी मंजूरी से खरीदार आकर्षित

Summary
अगस्त में इराक का तेल निर्यात काफी बढ़ गया, जिसे भारी कीमतों में छूट और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों को गुजरने की अनुमति देने से बल मिला। इस सुधार से भारत और चीन जैसे प्रमुख आयातकों के लिए भारी, उच्च-सल्फर वाले कच्चे तेल की आपूर्ति में सुधार होने की उम्मीद है।
इराक का तेल निर्यात अगस्त में जुलाई के निचले स्तर से काफी सुधर गया है, और सितंबर में शिपमेंट के और बढ़ने की उम्मीद है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कीमतों में भारी छूट और ईरान द्वारा इराकी टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने के फैसले ने खरीदारों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
निर्यात के आंकड़ों में उछाल
आंकड़ों के अनुसार, इराक का तेल निर्यात अगस्त में बढ़कर लगभग 23.4 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) हो गया, जबकि जुलाई में यह केवल 13.5 लाख bpd था। यह वृद्धि वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
जहाज-ट्रैकिंग फर्मों वोर्टेक्सा (Vortexa) और केप्लर (Kpler) के शुरुआती आंकड़ों से भी इस वृद्धि की पुष्टि होती है। उनके अनुसार अगस्त में निर्यात क्रमशः 23 लाख bpd और 21.7 लाख bpd रहा। हालांकि, यह स्तर अभी भी फरवरी में संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तरों से कम है, जब इन्हीं फर्मों ने क्रमशः 37 लाख bpd और 33.62 लाख bpd का निर्यात दर्ज किया था।
निर्यात में वृद्धि के पीछे के कारक
निर्यात में इस उछाल के दो मुख्य कारण हैं। पहला, इराक की सरकारी तेल विपणन कंपनी (SOMO) द्वारा दी गई भारी छूट है। रिपोर्ट के मुताबिक, SOMO ने बसरा बंदरगाह से लोड होने वाले अगस्त के कार्गो को $25 से $30 प्रति बैरल की छूट पर फ्री-ऑन-बोर्ड (FOB) आधार पर बेचा, जिससे यह खरीदारों के लिए बेहद आकर्षक हो गया।
Adदूसरा महत्वपूर्ण कारक ईरान का सहयोग है। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी, इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (IRNA) ने पिछले हफ्ते रिपोर्ट दी थी कि तेहरान ने कई इराकी टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की मंजूरी दे दी है। यह जलडमरूमध्य 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से शिपिंग के लिए लगभग बंद हो गया था, जिससे इराक के निर्यात में भारी गिरावट आई थी।
बाजार और आयातकों पर प्रभाव
इराक पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इसलिए, इसके निर्यात में किसी भी तरह का बदलाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर सीधा असर डालता है। निर्यात में यह वृद्धि वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति की चिंताओं को कुछ हद तक कम कर सकती है।
बढ़ी हुई आपूर्ति से चीन और भारत जैसे प्रमुख एशियाई आयातकों को विशेष रूप से राहत मिलने की उम्मीद है। ये देश भारी, उच्च-सल्फर वाले कच्चे तेल के बड़े खरीदार हैं, और इराक से आपूर्ति में सुधार उनकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।