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ईरान के IRGC ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया, तेल आपूर्ति पर संकट के बादल

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Jul 12, 20262 min read
ईरान के IRGC ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया, तेल आपूर्ति पर संकट के बादल
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ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना ने रविवार तड़के होर्मुज जलडमरूमध्य को अगली सूचना तक बंद करने की घोषणा की है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में हलचल मच गई है। सरकारी मीडिया द्वारा जारी रिपोर्टों के अनुसार, यह कदम एक जहाज पर चेतावनी गोलीबारी के बाद उठाया गया, जिसने कथित तौर पर एक अनधिकृत मार्ग से गुजरने का प्रयास किया था।

क्या हुआ?

रॉयटर्स ने स्थानीय सरकारी मीडिया के हवाले से बताया कि IRGC की नौसेना ने एक अज्ञात जहाज को रोका, जो एक गैर-अनुमोदित समुद्री मार्ग का उपयोग कर रहा था। जहाज को रोकने के लिए चेतावनी के तौर पर गोली चलाई गई। इस घटना के तुरंत बाद, IRGC ने इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग को पूरी तरह से बंद करने का ऐलान कर दिया।

यह बंद कब तक जारी रहेगा, इस बारे में कोई स्पष्ट समय-सीमा नहीं दी गई है। बयान में केवल "अगली सूचना तक" बंद रहने की बात कही गई है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है।

बाजार पर संभावित प्रभाव

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होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट्स में से एक है। दुनिया का लगभग 20-30% समुद्री तेल व्यापार इसी मार्ग से होता है।

  • कच्चे तेल की कीमतें: इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति में तत्काल बाधा उत्पन्न हो सकती है, जिससे ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड वायदा की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है।
  • आपूर्ति श्रृंखला: लंबे समय तक बंद रहने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होगी, जिसका असर कई उद्योगों पर पड़ेगा और शिपिंग लागत में वृद्धि होगी।
  • भू-राजनीतिक जोखिम: इस घटना से मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है, जिससे निवेशक सुरक्षित-निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और खुले समुद्र से जोड़ता है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और लंबे समय से ईरान तथा पश्चिमी देशों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव का केंद्र रहा है। पहले भी इस क्षेत्र में जहाजों को जब्त करने और सैन्य तनाव की घटनाएं हो चुकी हैं। निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की इस स्थिति पर कड़ी नजर रहेगी क्योंकि इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है।

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