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होरमुज़ जलडमरूमध्य में अस्थायी शिपिंग गलियारे पर ईरान और ओमान की बातचीत

Summary
अमेरिका के साथ बढ़ते आर्थिक दबाव और गतिरोध के बीच, ईरान और ओमान ने रणनीतिक होरमुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से एक अस्थायी शिपिंग गलियारा बनाने पर बातचीत फिर से शुरू कर दी है।
ईरान और ओमान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होरमुज़ जलडमरूमध्य के प्रबंधन के लिए बातचीत फिर से शुरू कर दी है। यह कदम अमेरिका के साथ ईरान के बढ़ते आर्थिक दबाव और राजनयिक गतिरोध के बीच आया है, जिसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग को आंशिक रूप से फिर से खोलना है।
अस्थायी गलियारे पर चर्चा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों ने मंगलवार को एक "संयुक्त अस्थायी नौवहन गलियारे" (joint temporary navigational corridor) पर चर्चा की। इस बातचीत में जलमार्ग को बारूदी सुरंगों से साफ करने पर सहमति भी शामिल थी।
यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उन पिछली टिप्पणियों के बावजूद आया है, जिनमें उन्होंने कहा था कि जलडमरूमध्य में सभी बारूदी सुरंगों को पहले ही साफ कर दिया गया है। अमेरिका और ईरान के बीच सक्रिय शत्रुता काफी हद तक कम हो गई है, लेकिन शांति समझौते के लिए राजनयिक प्रयास अभी भी रुके हुए हैं।
बाजार पर प्रभाव और मौजूदा तनाव
इन वार्ताओं के बावजूद, तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि व्यापारियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों के तत्काल प्रभाव को ज्यादा महत्व नहीं दिया। फरवरी में संघर्ष शुरू होने से पहले, यह जलमार्ग वैश्विक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के लगभग पांचवें हिस्से का परिवहन करता था, लेकिन तब से अधिकांश शिपिंग बंद है।
Adजलमार्ग के पास तनाव अभी भी बना हुआ है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि मंगलवार को ओमान के तट से लगभग 9 समुद्री मील (17 किमी) दूर एक तेल टैंकर पर एक अज्ञात प्रक्षेप्य से हमला किया गया।
व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ
अमेरिका ने हाल ही में ईरान के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों को दंडित करने की धमकी दी थी, हालांकि यह भी कहा कि दंड तुरंत लागू नहीं किए जाएंगे। ईरान ने इस कदम को "घोर गैरकानूनी" बताते हुए इसकी निंदा की है।
इस बीच, रॉयटर्स ने मामले से परिचित दो लोगों का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिका मध्य पूर्व में कुछ राजनयिक मिशनों में कर्मचारियों को वापस भेजना शुरू कर रहा है। यह कदम संकेत दे सकता है कि वाशिंगटन निकट भविष्य में ईरान के साथ संघर्ष के बढ़ने का जोखिम कम देख रहा है।