Story
भारत में जुलाई में ईंधन की मांग 2.9% बढ़ी, डीजल और पेट्रोल की खपत में तेजी

Summary
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में भारत की कुल ईंधन खपत सालाना आधार पर 2.9% बढ़कर 1.992 करोड़ मीट्रिक टन हो गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से परिवहन ईंधन, विशेष रूप से डीजल और पेट्रोल की मजबूत मांग के कारण हुई।
पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में ईंधन की खपत जुलाई में सालाना आधार पर 2.9% बढ़कर 1.992 करोड़ मीट्रिक टन हो गई। यह वृद्धि आर्थिक गतिविधियों में निरंतरता का संकेत देती है, जिसमें परिवहन ईंधन की मांग प्रमुख चालक रही।
प्रमुख उत्पादों का प्रदर्शन
आंकड़ों का विश्लेषण विभिन्न ईंधन श्रेणियों में मांग के मिश्रित रुझान को दर्शाता है। परिवहन क्षेत्र में मजबूत वृद्धि देखी गई, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई।
- डीजल: देश में सबसे ज्यादा खपत होने वाले ईंधन, डीजल की बिक्री सालाना आधार पर 10.0% बढ़कर 80.9 लाख मीट्रिक टन हो गई। यह औद्योगिक और कृषि गतिविधियों में तेजी का एक प्रमुख संकेतक है।
- पेट्रोल (गैसोलीन): पेट्रोल की बिक्री 9.2% बढ़कर 38.2 लाख मीट्रिक टन पर पहुंच गई, जो व्यक्तिगत वाहनों की आवाजाही में वृद्धि को दर्शाता है।
- रसोई गैस (LPG): इसके विपरीत, रसोई गैस की बिक्री में 16.4% की बड़ी गिरावट आई और यह 23.5 लाख मीट्रिक टन रह गई।
- नैफ्था: नैफ्था की बिक्री भी 13.8% घटकर 8.3 लाख मीट्रिक टन पर आ गई।
Adऔद्योगिक और अवसंरचना मांग
औद्योगिक और अवसंरचना क्षेत्रों से मांग में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले बिटुमेन (डामर) की बिक्री जुलाई में 8.5% बढ़ी।
इसके अलावा, औद्योगिक भट्टियों और बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन तेल की खपत में 29.7% की प्रभावशाली वृद्धि देखी गई, जो औद्योगिक उत्पादन में मजबूती का संकेत देता है। ये आंकड़े व्यापक आर्थिक सुधार के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं, भले ही कुल वृद्धि मामूली रही हो।