Story

अगस्त में भारत की ईंधन खपत 2.8% घटी, लेकिन पेट्रोल-डीजल की मांग मजबूत रही

ENTHMSVIIDZHZH-TWJAKOHI
Sep 9, 20262 min read
अगस्त में भारत की ईंधन खपत 2.8% घटी, लेकिन पेट्रोल-डीजल की मांग मजबूत रही

Summary

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में भारत की कुल ईंधन खपत में साल-दर-साल 2.8% की गिरावट आई, हालांकि परिवहन ईंधन पेट्रोल और डीजल की बिक्री में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

Text size
Background

पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की ईंधन खपत अगस्त में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 2.8% घटकर 18.61 मिलियन मीट्रिक टन रह गई। ईंधन की खपत को देश में तेल की मांग और आर्थिक गतिविधि के लिए एक महत्वपूर्ण प्रॉक्सी संकेतक माना जाता है।

समग्र गिरावट के बावजूद, प्रमुख परिवहन ईंधनों की मांग में वृद्धि देखी गई, जो आर्थिक गतिविधियों में निरंतरता का संकेत देती है। हालांकि, रसोई गैस और औद्योगिक ईंधनों में गिरावट ने कुल आंकड़ों को नीचे खींच लिया।

प्रमुख ईंधनों का प्रदर्शन

आंकड़े विभिन्न श्रेणियों में एक मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। जहां व्यक्तिगत गतिशीलता और माल ढुलाई से जुड़े ईंधन बढ़े, वहीं घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में गिरावट देखी गई।

  • पेट्रोल (Gasoline): बिक्री साल-दर-साल 8.2% बढ़कर 3.84 मिलियन मीट्रिक टन हो गई।
  • डीजल (Diesel): देश में सबसे ज्यादा खपत होने वाले इस ईंधन की बिक्री 6.8% बढ़कर 7.02 मिलियन मीट्रिक टन पर पहुंच गई।
  • रसोई गैस (LPG): खपत में 17.2% की भारी गिरावट आई और यह 2.35 मिलियन मीट्रिक टन रही।
  • नैफ्था (Naphtha): बिक्री 22.3% घटकर 0.83 मिलियन मीट्रिक टन रह गई।
Sample IUX Markets – In-articleAd

बाजार के लिए मायने

विश्लेषकों के लिए, ये आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की एक जटिल तस्वीर पेश करते हैं। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती मांग, जिसे अक्सर आर्थिक स्वास्थ्य का बैरोमीटर माना जाता है, एक सकारात्मक संकेत है। यह निरंतर व्यक्तिगत आवाजाही और मजबूत माल ढुलाई गतिविधि को दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त, सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले बिटुमेन की बिक्री में 19.8% की मजबूत वृद्धि और फ्यूल ऑयल की खपत में 4.8% की बढ़ोतरी बुनियादी ढांचे और औद्योगिक क्षेत्रों में गतिविधि का समर्थन करती है। हालांकि, एलपीजी और नैफ्था में तेज गिरावट विशिष्ट क्षेत्रों में मांग के दबाव या आधारभूत प्रभावों की ओर इशारा कर सकती है, जिन पर निवेशक करीब से नजर रखेंगे।

Back to latest news

LATEST