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अगस्त में भारत की ईंधन मांग 2.8% घटी, डीजल-पेट्रोल की बिक्री में वृद्धि

Summary
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में भारत की कुल ईंधन खपत में साल-दर-साल 2.8% की गिरावट आई, हालांकि डीजल और पेट्रोल की मांग में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।
अगस्त में भारत की कुल ईंधन खपत में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 2.8% की गिरावट दर्ज की गई, जो कुल 18.61 मिलियन मीट्रिक टन रही। यह जानकारी तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों से सामने आई है।
प्रमुख ईंधनों का प्रदर्शन
आंकड़े विभिन्न क्षेत्रों में मांग का मिला-जुला रुख दर्शाते हैं। परिवहन ईंधन, यानी पेट्रोल और डीजल, की बिक्री में मजबूत वृद्धि देखी गई, जो आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत है। हालांकि, रसोई गैस (LPG) और नैफ्था की खपत में भारी गिरावट ने कुल आंकड़ों को प्रभावित किया।
- पेट्रोल: बिक्री साल-दर-साल 8.2% बढ़कर 3.84 मिलियन मीट्रिक टन हो गई।
- डीजल: खपत 6.8% बढ़कर 7.02 मिलियन मीट्रिक टन पर पहुंच गई। डीजल की मांग को अक्सर देश में आर्थिक गतिविधि का एक प्रमुख बैरोमीटर माना जाता है।
- LPG (रसोई गैस): बिक्री में 17.2% की बड़ी गिरावट आई और यह 2.35 मिलियन मीट्रिक टन रही।
- नैफ्था: खपत 22.3% घटकर 0.83 मिलियन मीट्रिक टन रह गई।
औद्योगिक और निर्माण क्षेत्र में मांग
Adसकारात्मक पक्ष पर, निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े ईंधनों की मांग में वृद्धि हुई। सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले बिटुमेन की बिक्री अगस्त में 19.8% बढ़ी, जो बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निरंतर गति का संकेत देता है।
इसी तरह, औद्योगिक भट्टियों और बिजली संयंत्रों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन तेल (Fuel Oil) की खपत में भी 4.8% की वृद्धि दर्ज की गई, जो औद्योगिक उत्पादन में मजबूती को दर्शाता है।
बाजार के लिए मायने
कुल ईंधन खपत में गिरावट के बावजूद, डीजल और पेट्रोल की बढ़ती मांग एक सकारात्मक संकेत है। यह दर्शाता है कि व्यक्तिगत गतिशीलता और माल ढुलाई जैसी प्रमुख आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि एलपीजी और नैफ्था में गिरावट विशिष्ट कारकों के कारण हो सकती है, जबकि डीजल, पेट्रोल और बिटुमेन की वृद्धि व्यापक आर्थिक स्वास्थ्य का बेहतर संकेतक है। भारत में ईंधन की खपत को तेल की मांग के एक प्रमुख प्रॉक्सी के रूप में देखा जाता है, और ऊर्जा बाजार इन मिश्रित संकेतों पर बारीकी से नजर रखेंगे।