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भारत ने डीजल और जेट ईंधन के निर्यात पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ कर में कटौती की।

Summary
भारत सरकार ने निर्यात किए जाने वाले डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को कम कर दिया है, जिससे देश के तेल शोधकों के लाभ मार्जिन में सुधार हो सकता है।
शनिवार को जारी एक सरकारी आदेश के अनुसार, भारतीय सरकार ने डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स) में कमी की है। संशोधित दरें 1 अक्टूबर से प्रभावी होंगी।
कर समायोजन का विवरण
अधिसूचना में ईंधन निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में की गई विशिष्ट कटौतियों का उल्लेख किया गया है। अन्य पेट्रोलियम उत्पादों पर कर अपरिवर्तित रखा गया है।
- डीजल: निर्यात शुल्क 20 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
- विमानन टरबाइन ईंधन: शुल्क 15 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 10.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
- अन्य पेट्रोलियम उत्पाद: निर्यात शुल्क 0.5 रुपये प्रति लीटर पर अपरिवर्तित है।
Adसंदर्भ और बाजार पर प्रभाव
भारत ने वैश्विक कच्चे तेल की उच्च कीमतों से अर्जित असाधारण लाभ के एक हिस्से को प्राप्त करने के लिए ऊर्जा कंपनियों पर अप्रत्याशित लाभ कर लगाया था। सरकार अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रिफाइनरियों के लाभ मार्जिन के अनुरूप इन कर दरों की समीक्षा और समायोजन आमतौर पर हर दो सप्ताह में करती है।
कर में कमी आम तौर पर रिफाइनिंग मार्जिन में हाल के उच्चतम स्तर से आई नरमी का संकेत देती है। इस कदम से भारतीय रिफाइनरी संचालकों, विशेष रूप से रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसे निजी क्षेत्र के निर्यातकों को प्रत्यक्ष लाभ होने की उम्मीद है, क्योंकि इससे उनके विदेशी शिपमेंट की लाभप्रदता में सुधार होगा।