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रुपये में निर्यात भुगतान को बढ़ावा: सरकार ने व्यापार नीति के नियमों में दी ढील

भारत सरकार ने रुपये के वैश्विक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने गुरुवार को नियमों में संशोधन करते हुए रुपये में किए गए निर्यात भुगतानों को विदेशी मुद्रा आय के बराबर व्यापारिक लाभ देने की घोषणा की है।
नीति में प्रमुख बदलाव
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा विदेश व्यापार नीति में किए गए इस तत्काल प्रभावी बदलाव के तहत, अब निर्यातक भारतीय रुपये में निर्यात अनुबंध, चालान (invoice) और भुगतान कर सकते हैं। पहले, अधिकांश मामलों में व्यापारिक लाभ प्राप्त करने के लिए निर्यात आय को स्वतंत्र रूप से परिवर्तनीय मुद्राओं में प्राप्त करना अनिवार्य था, भले ही चालान रुपये में जारी किया गया हो।
इस संशोधन के बाद, अनुमोदित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से प्राप्त रुपये में निर्यात आय अब इन लाभों के लिए पात्र होगी। यह कदम निर्यातकों के लिए एक बड़ी बाधा को दूर करता है और उन्हें भुगतान के लिए अधिक लचीलापन प्रदान करता है।
बाज़ार और निर्यातकों के लिए इसका क्या मतलब है
यह निर्णय रुपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण की दिशा में एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इससे वैश्विक व्यापार में भारतीय मुद्रा की मांग और स्वीकार्यता बढ़ने की उम्मीद है।
Ad- निर्यातकों के लिए: मुद्रा रूपांतरण से जुड़े जोखिम और लागत कम हो सकती है। यह उन देशों के साथ व्यापार को सुगम बना सकता है जिनके पास विदेशी मुद्रा भंडार सीमित है।
- अर्थव्यवस्था के लिए: लंबी अवधि में, यह अमेरिकी डॉलर जैसी प्रमुख मुद्राओं पर भारत की निर्भरता को कम करने में मदद कर सकता है।
नीतिगत संदर्भ और अपवाद
यह नीतिगत समायोजन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 2023 के विदेशी मुद्रा नियमों के अनुरूप है, जिसमें सीमा-पार लेनदेन में रुपये के व्यापक उपयोग की अनुमति दी गई थी। हालांकि, यह नियम कुछ अपवादों के साथ लागू होता है:
- यह नियम नेपाल और भूटान पर लागू नहीं होता है, जिनके लिए अलग व्यवस्थाएं हैं।
- एशियाई समाशोधन संघ (ACU) के सदस्य देशों (जैसे बांग्लादेश, ईरान, म्यांमार) के साथ लेनदेन आम तौर पर ACU द्वारा निर्धारित मुद्राओं में ही होते हैं, जब तक कि RBI द्वारा कोई विशेष निर्देश न दिया जाए।