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गूगल ने सेल्फ़ी वीडियो साइन-इन फ़ीचर लॉन्च किया, अकाउंट सुरक्षा को मिलेगी नई परत

अल्फाबेट (Alphabet) के स्वामित्व वाली गूगल (Google) ने गुरुवार को एक नया सेल्फ़ी वीडियो साइन-इन फ़ीचर लॉन्च किया है। यह यूज़र्स को पासवर्ड भूल जाने या डिवाइस तक पहुंच न होने की स्थिति में अपने अकाउंट में लॉगिन करने या उन्हें रिकवर करने का एक अतिरिक्त विकल्प प्रदान करता है।
यह नया फ़ीचर कैसे काम करता है?
इस नई सुविधा के तहत, यूज़र्स को वेरिफिकेशन सेट अप करने के लिए निर्देशित सिर के मूवमेंट (guided head movements) करते हुए अपना एक छोटा वीडियो रिकॉर्ड करना होगा। यह प्रक्रिया कई एंगल्स से चेहरे को कैप्चर करती है।
गूगल इस रिकॉर्डिंग को सेव कर लेगा और भविष्य में साइन-इन के प्रयासों के दौरान यूज़र्स द्वारा अपलोड किए गए लाइव वीडियो को प्रमाणित करने के लिए इसका उपयोग करेगा। इस फ़ीचर का उद्देश्य धोखाधड़ी के खिलाफ़ मजबूत सुरक्षा प्रदान करना और खोए या चोरी हुए डिवाइस के मामलों में बेहतर अकाउंट रिकवरी विकल्प देना है।
सुरक्षा और गोपनीयता की चिंताएं
हालांकि यह फ़ीचर सुरक्षा बढ़ाता है, लेकिन इसने बायोमेट्रिक डेटा संग्रह और गोपनीयता को लेकर कुछ चिंताएं भी पैदा की हैं। गूगल ने स्पष्ट किया है कि सेल्फ़ी वीडियो यूज़र की सहमति से संग्रहीत किया जाता है, और यूज़र के पास इसे किसी भी समय अपने गूगल अकाउंट से हटाने का विकल्प होता है।
Adकंपनी के अनुसार, वीडियो का उपयोग केवल साइन-इन उद्देश्यों के लिए किया जाएगा, जब तक कि यूज़र अतिरिक्त उपयोग के मामलों के लिए ऑप्ट-इन नहीं करता। गूगल ने यह भी कहा कि वह डीपफेक सहित किसी भी तरह के प्रतिरूपण (impersonation) के प्रयासों का पता लगाने के लिए कई सुरक्षा जांचों का उपयोग करता है, जिसमें नए रिकॉर्डिंग की तुलना सहेजे गए वीडियो से करना शामिल है।
यूज़र्स के लिए इसका क्या मतलब है?
यह नई सुविधा गुरुवार से योग्य गूगल अकाउंट यूज़र्स के लिए उपलब्ध है। वर्तमान में, कंपनियां अकाउंट-रिकवरी प्रक्रियाओं के लिए विश्वसनीय डिवाइस, पंजीकृत फ़ोन नंबर, रिकवरी कॉन्टैक्ट और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जैसे तरीकों पर निर्भर करती हैं।
बायोमेट्रिक और चेहरे की पहचान लंबे समय से गोपनीयता संबंधी चिंताओं का विषय रही है। गूगल का यह कदम इस बहस को आगे बढ़ाता है कि सुविधा और सुरक्षा के लिए यूज़र्स कितनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने को तैयार हैं।