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वॉलर की टिप्पणी से दर वृद्धि की आशंकाएं कम, सोना $4,500 के करीब स्थिर

Summary
फेडरल रिजर्व गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर के बयानों के बाद सोने की कीमतों में स्थिरता आई है, जिससे ब्याज दरों में और वृद्धि की उम्मीदें कम हो गई हैं। वॉलर ने संकेत दिया कि यदि मुद्रास्फीति में नरमी जारी रहती है तो वह दरों को स्थिर रखने का समर्थन कर सकते हैं।
फेडरल रिजर्व के एक शीर्ष अधिकारी की टिप्पणी के बाद सोने की कीमतें गुरुवार को $4,500 प्रति औंस के आसपास स्थिर रहीं, जिससे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हो गईं। पिछली रात की लगभग 2% की मजबूत बढ़त के बाद यह स्थिरता आई है, जिसे कमजोर डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से भी सहारा मिला।
वॉलर की टिप्पणी और बाजार पर इसका असर
सोने की कीमतों में उछाल का मुख्य कारण फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर का बयान रहा। Investing.com की रिपोर्ट के अनुसार, वॉलर ने संकेत दिया कि यदि आगामी आंकड़े मुद्रास्फीति में लगातार नरमी दिखाते हैं, तो वह 15-16 सितंबर को होने वाली फेड की बैठक में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने का समर्थन कर सकते हैं।
वॉलर की इस टिप्पणी ने बाजार की उम्मीदों को काफी प्रभावित किया है। सितंबर में दर वृद्धि की संभावना, जो इस सप्ताह की शुरुआत में लगभग 70% थी, अब घटकर लगभग आधी रह गई है। चूंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता है, इसलिए कम ब्याज दर का माहौल इसे बॉन्ड जैसी ब्याज-अर्जित करने वाली संपत्तियों की तुलना में अधिक आकर्षक बनाता है।
प्रमुख आंकड़े और तकनीकी स्तर
अब निवेशकों की नजर शुक्रवार को आने वाली अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट और अगले सप्ताह के मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर है। ये आंकड़े फेडरल रिजर्व के अगले कदम के लिए महत्वपूर्ण संकेत देंगे।
Adआईजी ग्रुप के वरिष्ठ बाजार विश्लेषक टोनी साइकामोर के अनुसार, सोना अपने जून के निचले स्तर $3,942 से ऊपर बना हुआ है, जो मध्यम अवधि में एक आधार बनने का समर्थन करता है। हालांकि, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पिछले सप्ताह सोने का $4,526 के आसपास के 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से नीचे गिरना एक अल्पकालिक तकनीकी क्षति थी।
अन्य सहायक कारक
डॉलर में कमजोरी ने भी सोने को समर्थन दिया, जिसका एक कारण जापानी येन में गुरुवार को आई लगभग 2% की तेज मजबूती थी। कमजोर डॉलर अन्य मुद्राओं का उपयोग करने वाले खरीदारों के लिए सोने को सस्ता बनाता है।
इसके अतिरिक्त, मध्य पूर्व में तनाव कम होने से ऊर्जा की कीमतों और मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं का दबाव कुछ हद तक कम हुआ है, जिससे बाजार की जोखिम धारणा में सुधार हुआ है और कीमती धातु को लाभ मिला है।