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एनी के सीईओ की चेतावनी: मध्य पूर्व में तनाव जारी रहा तो 2027 तक तेल $100 के पार जा सकता है

इटली की प्रमुख ऊर्जा कंपनी एनी (Eni) के सीईओ क्लाउडियो डेस्काल्ज़ी ने एक कड़ी चेतावनी जारी की है कि यदि मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बना रहा, तो 2027 की पहली तिमाही तक कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकती हैं। कीमतों में इस संभावित उछाल से वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और ऊर्जा की मांग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
मुख्य चेतावनी और कारण
इटली के समाचार पत्र 'Il Sole 24 Ore' के साथ एक साक्षात्कार में, डेस्काल्ज़ी ने कहा कि अब तक रणनीतिक तेल भंडारों से आपातकालीन रिलीज ने कीमतों में तेज वृद्धि को रोका है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि यह उपाय अनिश्चित काल तक जारी नहीं रह सकता क्योंकि वैश्विक भंडार सीमित हैं।
डेस्काल्ज़ी ने इस बात पर भी जोर दिया कि ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण आपूर्ति में व्यवधान से वैश्विक तेल भंडार में गिरावट आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि भंडारों में लगातार कमी बाजार को भविष्य के भू-राजनीतिक झटकों के प्रति और अधिक संवेदनशील बना देगी, जिससे कीमतों में अचानक उछाल का खतरा बढ़ जाएगा।
बाजार पर असर और मौजूदा कीमतें
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब बाजार में पहले से ही भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (geopolitical risk premium) बना हुआ है। अमेरिका-ईरान के बीच नए सिरे से शत्रुता और होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग पर हमलों के कारण तेल की कीमतों में हाल ही में तेजी देखी गई।
Adपिछले सप्ताह के अंत में, बाजार ने इस तनाव पर प्रतिक्रिया दी:
- ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 5.4% की साप्ताहिक बढ़त के साथ $76 प्रति बैरल पर बंद हुआ।
- डब्ल्यूटीआई क्रूड वायदा में लगभग 4% की तेजी आई और यह $71.40 प्रति बैरल के आसपास रहा।
दीर्घकालिक समाधान और ऊर्जा सुरक्षा
डेस्काल्ज़ी के अनुसार, इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान ऊर्जा सुरक्षा में सुधार करना है। उन्होंने आपूर्तिकर्ताओं और परिवहन मार्गों दोनों में विविधता लाने पर जोर दिया, ताकि होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों पर अत्यधिक निर्भरता कम हो सके।
उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारों को उत्तरी अफ्रीका, उप-सहारा अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया में उत्पादकों के साथ ऊर्जा संबंधों को गहरा करना चाहिए। एनी के सीईओ ने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटरों के तेजी से विस्तार से बिजली की मांग बढ़ रही है, जिससे विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो गई है।