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ट्रंप की धमकियों का हवाला देते हुए डिज़्नी ने FCC की कार्रवाई को रोकने की मांग की

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Sep 17, 20262 min read
ट्रंप की धमकियों का हवाला देते हुए डिज़्नी ने FCC की कार्रवाई को रोकने की मांग की

Summary

वॉल्ट डिज़्नी कंपनी ने एक अदालत में याचिका दायर कर कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पत्रकारों को दी जा रही धमकियों के कारण संघीय संचार आयोग (FCC) को उसके ABC स्टेशनों के लाइसेंस की समीक्षा करने से रोका जाना चाहिए।

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Background

वॉल्ट डिज़्नी कंपनी ने गुरुवार को एक अदालत में याचिका दायर कर संघीय संचार आयोग (FCC) की एक कार्रवाई को रोकने की मांग की है। कंपनी का तर्क है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पत्रकारों और प्रसारण नेटवर्कों के खिलाफ लगातार दी जा रही धमकियों के आधार पर FCC को उसके आठ ABC स्टेशन लाइसेंसों की समय से पहले समीक्षा करने से रोका जाना चाहिए।

डिज़्नी की कानूनी दलील

गुरुवार को दायर अपनी अदालती फाइलिंग में, डिज़्नी और उसकी सहायक कंपनी ABC ने तर्क दिया कि FCC की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं है और यह राजनीतिक दबाव में की जा रही है। याचिका में सीधे तौर पर FCC अध्यक्ष ब्रेंडन कार पर आरोप लगाया गया है कि वह राष्ट्रपति ट्रंप के उन विशिष्ट निर्देशों पर काम कर रहे हैं जिनका उद्देश्य "प्रशासन की आलोचना करने वाली अभिव्यक्ति को रोकना" है।

कंपनी के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को लगातार दी जाने वाली सार्वजनिक धमकियां इस बात का पर्याप्त आधार हैं कि अदालत को इस नियामक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना चाहिए। यह कदम मीडिया की स्वतंत्रता और नियामक निकायों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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विवाद का संदर्भ और प्रभाव

यह मामला डिज़्नी के स्वामित्व वाले आठ ABC टेलीविजन स्टेशनों के प्रसारण लाइसेंसों की समय से पहले समीक्षा से जुड़ा है। प्रसारण लाइसेंस किसी भी मीडिया कंपनी के संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं और इनकी समीक्षा में किसी भी तरह की अनियमितता कंपनी के लिए एक बड़ा नियामक और वित्तीय जोखिम पैदा कर सकती है।

यह कानूनी लड़ाई मीडिया उद्योग में एक बड़ी बहस को उजागर करती है, जो राजनीतिक दबाव और नियामक निकायों की स्वतंत्रता से संबंधित है। निवेशकों के लिए, यह डिज़्नी (DIS) के प्रसारण कारोबार से जुड़े एक संभावित जोखिम को दर्शाता है, जहाँ राजनीतिक तनाव नियामक निर्णयों को प्रभावित कर सकता है। इस मामले का नतीजा भविष्य में FCC जैसी एजेंसियों के काम करने के तरीके पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

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