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सिनोपेक का अनुमान: 2026 में चीन की तेल मांग में 8.9% की गिरावट आएगी

Summary
सिनोपेक के एक शोध संस्थान ने अनुमान लगाया है कि 2026 में चीन की तेल मांग में 8.9% की गिरावट आएगी, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता उपयोग है।
सिनोपेक इकोनॉमिक्स एंड डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, 2026 में चीन की तेल मांग में पिछले वर्ष की तुलना में 8.9% की भारी गिरावट आने का अनुमान है। यह गिरावट, जो प्रतिदिन 600,000 बैरल के बराबर है, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को तेजी से अपनाने के कारण होगी।
पूर्वानुमान का विवरण
संस्थान की रिपोर्ट में विभिन्न ईंधन प्रकारों के लिए मांग के रुझानों का विश्लेषण किया गया है। इसमें कहा गया है कि 2026 में चीन में मांग में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा:
- गैसोलीन: मांग में साल-दर-साल 8.7% की कमी का अनुमान है।
- डीज़ल: मांग में 11.4% की और भी बड़ी गिरावट का पूर्वानुमान है।
- जेट फ्यूल: इसके विपरीत, विमानन क्षेत्र में सुधार के चलते जेट फ्यूल की मांग में 1.3% की मामूली वृद्धि का अनुमान है।
मांग का चरम और दीर्घकालिक दृष्टिकोण
यह पूर्वानुमान इस आकलन पर आधारित है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक चीन में तेल की मांग का चरम 2025 में ही बीत चुका है। यह वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत है।
Adसिनोपेक का अनुमान है कि 2030 तक चीन की तेल मांग 750 मिलियन टन से नीचे आ जाएगी और 2060 तक यह घटकर लगभग 300 मिलियन टन रह जाएगी। यह दीर्घकालिक गिरावट ऊर्जा परिवर्तन की गति को रेखांकित करती है, जिसका तेल उत्पादक देशों और वैश्विक कीमतों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
रिफाइनिंग क्षेत्र पर प्रभाव
मांग में नरमी का असर चीन के विशाल रिफाइनिंग क्षेत्र पर पहले से ही दिख रहा है। सिनोपेक ने बताया कि 2026 में देश की रिफाइनिंग क्षमता 952 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुंच गई।
हालांकि, दूसरी और तीसरी तिमाही में देश का क्रूड रन 5.4% घटकर 697 मिलियन टन रह गया, जिससे रिफाइनरियों की उपयोग दर गिरकर 73.2% पर आ गई। यह आंकड़ा मांग में कमी के कारण उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियों को दर्शाता है।