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लाल सागर में हमलों पर ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की धमकी, ब्रेंट क्रूड $100 के पार

Summary
यमन के हूती लड़ाकों द्वारा सऊदी तेल टैंकरों पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और हूतियों के खिलाफ 'बड़ी सैन्य सज़ा' की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर यमन के हूती लड़ाकों द्वारा किए गए हमले के बाद ईरान और उसके सहयोगियों को "बड़ी सैन्य सज़ा" देने का वादा किया है। इस भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक तेल बाज़ारों में भारी उछाल आया और ब्रेंट क्रूड की कीमतें मई के बाद पहली बार $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं।
क्या है पूरा मामला?
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब हूती लड़ाकों ने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों, एन्सेलिया और लैला पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने का दावा किया। रॉयटर्स के अनुसार, इस हमले के बाद हूतियों ने सऊदी अरब पर नौसैनिक नाकेबंदी लगाने की भी घोषणा की। यह कदम सऊदी अरब के लिए एक बड़ी चुनौती है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की नाकेबंदी से बचने के लिए पाइपलाइन के ज़रिए लाल सागर तक प्रतिदिन लाखों बैरल तेल पहुँचाता है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "अगर वे ऐसा दोबारा करते हैं, तो अमेरिका ईरान को ज़िम्मेदार ठहराएगा... ईरान और निश्चित रूप से, हूतियों को बड़ी सैन्य सज़ा दी जाएगी।" उन्होंने यह भी कहा कि मालवाहक जहाज़ों को हुए "किसी भी और सभी नुकसान" का भुगतान संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ज़ब्त की गई "ईरानी संपत्ति" से किया जाएगा, हालांकि उन्होंने इसका तरीका स्पष्ट नहीं किया।
बाज़ार पर असर
मध्य पूर्व में संघर्ष के एक और प्रमुख शिपिंग चोकपॉइंट तक फैलने की आशंका से ऊर्जा बाज़ारों में घबराहट फैल गई।
Ad- तेल की कीमतों में उछाल: वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 6% से अधिक चढ़कर $100 प्रति बैरल के पार पहुँच गया, जो इस युद्ध के दौरान सबसे तेज़ वृद्धि में से एक है।
- शिपिंग लागत बढ़ी: रिपोर्ट किए गए हमलों के बाद, दक्षिणी लाल सागर से गुज़रने के लिए शिपिंग बीमा की लागत कुछ कंपनियों के लिए दोगुनी हो गई।
- व्यापार मार्ग बाधित: कई तेल टैंकरों ने बाब अल-मन्देब जलडमरूमध्य से बचने के लिए अपना मार्ग बदल दिया है। वे अब स्वेज़ नहर के माध्यम से उत्तर की ओर जा रहे हैं, जिससे एशियाई ग्राहकों तक पहुँचने के लिए अफ्रीका के चारों ओर एक बहुत लंबा और महंगा मार्ग अपनाना पड़ सकता है।
बढ़ता भू-राजनीतिक जोखिम
यह हमला मध्य पूर्व में पहले से ही अस्थिर स्थिति को और जटिल बनाता है, जहाँ होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पहले से ही तनाव बना हुआ है। बाब अल-मन्देब जलडमरूमध्य, जिसे "आँसुओं का द्वार" भी कहा जाता है, लाल सागर से हिंद महासागर तक पहुँच को नियंत्रित करता है और यह होर्मुज के बाद ऊर्जा शिपमेंट के लिए दूसरा सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। विश्लेषकों का मानना है कि इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर परिणाम दे सकती है।
यह घटनाक्रम तब हुआ है जब अमेरिका ईरान पर लगातार हवाई हमले कर रहा है और जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों वाले पड़ोसी अरब देशों पर मिसाइलें दागी हैं। बढ़ती तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए चिंता बढ़ गई है।