Story
खाड़ी में तनाव के बीच एशियाई LNG की कीमतें चार महीने के उच्चतम स्तर पर

Summary
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव से होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आपूर्ति बाधित होने की चिंताओं के कारण एशिया में स्पॉट LNG की कीमतें लगातार चौथे सप्ताह बढ़कर $20.10 प्रति mmBtu पर पहुंच गईं।
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण आपूर्ति में व्यवधान की आशंकाओं के चलते एशिया में स्पॉट लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की कीमतें लगातार चौथे सप्ताह बढ़कर लगभग चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। यह वृद्धि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भू-राजनीतिक जोखिमों के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है।
कीमतों में तेज उछाल
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वोत्तर एशिया में सितंबर डिलीवरी के लिए LNG की औसत कीमत $20.10 प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (mmBtu) तक पहुंच गई, जो 20 मार्च के बाद का उच्चतम स्तर है। यह पिछले सप्ताह के $18 प्रति mmBtu के स्तर से एक उल्लेखनीय वृद्धि है।
कीमतों में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आपूर्ति बाधित होने की चिंताओं के कारण हुई है। यह एक महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग है, और इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के तेज होने से LNG टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव पड़ रहा है।
यूरोपीय बाजार का हाल
यूरोप में भी LNG की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, हालांकि एशियाई बाजारों की तुलना में थोड़ी कम हैं। S&P ग्लोबल एनर्जी ने गुरुवार को सितंबर कार्गो के लिए अपने दैनिक उत्तर-पश्चिम यूरोप LNG मूल्य बेंचमार्क का आकलन $18.189 प्रति mmBtu पर किया।
Adयह कीमत यूरोपीय गैस ट्रेडिंग के मुख्य केंद्र, TTF हब मूल्य की तुलना में $0.22 प्रति mmBtu की छूट को दर्शाती है। अन्य एजेंसियों के आकलन भी इसी दायरे में रहे:
- स्पार्क कमोडिटीज: $18.218 प्रति mmBtu
- आर्गस: $17.31 प्रति mmBtu
बाजार के लिए निहितार्थ
खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने से वैश्विक LNG आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए जोखिम बढ़ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की लंबी रुकावट से कीमतों में और अधिक अस्थिरता आ सकती है, जिसका असर दुनिया भर के ऊर्जा उपभोक्ताओं और उद्योगों पर पड़ेगा। निवेशक और ऊर्जा बाजार प्रतिभागी इस क्षेत्र के घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि तनाव बढ़ने से ऊर्जा सुरक्षा और लागत पर सीधा असर पड़ सकता है।