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एप्पल इवेंट के बाद लक्सशेयर प्रिसिजन के शेयरों में मुनाफावसूली, 4% से ज्यादा की गिरावट

एप्पल (Apple) के एक प्रमुख सप्लायर, लक्सशेयर प्रिसिजन इंडस्ट्री (Luxshare Precision Industry) के शेयरों में गुरुवार को हांगकांग में 4.1% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो HK$59.35 पर बंद हुए। यह गिरावट एप्पल के बहुप्रतीक्षित प्रोडक्ट लॉन्च इवेंट के बाद हुई मुनाफावसूली का नतीजा है, जिसे बाजार में 'अफवाह पर खरीदो, खबर पर बेचो' (buy the rumour, sell the news) की एक क्लासिक मिसाल माना जा रहा है।
मुख्य कारण: मुनाफावसूली
बुधवार को, एप्पल के इवेंट से पहले, निवेशकों ने लक्सशेयर के शेयरों में 3% से अधिक की खरीदारी की थी। यह खरीदारी इस उम्मीद में की गई थी कि कंपनी अपने पहले फोल्डेबल आईफोन का अनावरण करेगी, जिसके लिए लक्सशेयर एक महत्वपूर्ण सप्लाई चेन पार्टनर है।
इवेंट समाप्त होने के बाद, निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू कर दी, जिससे पिछले दिन की लगभग सारी बढ़त खत्म हो गई। एप्पल लक्सशेयर के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा है, इसलिए इसके शेयर एप्पल के प्रोडक्ट साइकिल के आसपास बहुत अस्थिर होते हैं। यह गिरावट कंपनी के फंडामेंटल्स में किसी भी कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि इवेंट से पहले बनी पोजिशन को खत्म करने का परिणाम है।
बाजार का दबाव और कंपनी का आउटलुक
लक्सशेयर के शेयरों में गिरावट को हांगकांग के शेयर बाजार में आई व्यापक कमजोरी से और बल मिला। गुरुवार को हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स (Hang Seng Index) लगभग 1.4% गिरा, जबकि हैंग सेंग टेक इंडेक्स (Hang Seng Tech Index) में लगभग 2% की गिरावट आई।
Adइस बिकवाली के बावजूद, कंपनी का वित्तीय दृष्टिकोण मजबूत बना हुआ है। Investing.com के अनुसार, लक्सशेयर ने 2026 के पहले नौ महीनों के लिए 15% से 25% के शुद्ध लाभ वृद्धि का प्रारंभिक अनुमान लगाया है।
व्यापक बाजार की चिंताएं
हांगकांग के बाजारों में बिकवाली का मुख्य कारण वैश्विक मैक्रो-इकोनॉमिक चिंताएं थीं।
- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें US$100 प्रति बैरल से ऊपर चली गईं, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ने का डर पैदा हो गया।
- बढ़ती महंगाई की आशंका ने निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को कम कर दिया है।
- अमेरिका में उम्मीद से बेहतर रोजगार के आंकड़ों के बाद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत सख्ती की चिंताओं ने भी टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव डाला।