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SK Hynix की लिस्टिंग से पहले वॉल स्ट्रीट की सपाट शुरुआत, मध्य पूर्व के तनाव पर भी नज़र

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Jul 10, 20261 min read
SK Hynix की लिस्टिंग से पहले वॉल स्ट्रीट की सपाट शुरुआत, मध्य पूर्व के तनाव पर भी नज़र

Summary

अमेरिकी शेयर बाज़ारों ने शुक्रवार को मिलीजुली शुरुआत की, क्योंकि निवेशक दक्षिण कोरियाई चिप कंपनी SK Hynix की बहुप्रतीक्षित नैस्डैक लिस्टिंग का इंतज़ार कर रहे थे। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से मुद्रास्फीति की चिंताएँ भी बाज़ार पर हावी रहीं।

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Background

वॉल स्ट्रीट के प्रमुख सूचकांकों ने शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत लगभग सपाट की, जहाँ निवेशकों की नज़र दक्षिण कोरियाई चिप दिग्गज SK Hynix की बहुप्रतीक्षित नैस्डैक लिस्टिंग पर है। वहीं, मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने मुद्रास्फीति को लेकर चिंताओं को फिर से हवा दे दी है।

शुरुआती कारोबार का हाल

रॉयटर्स के आंकड़ों के अनुसार, शुरुआती घंटी बजने पर प्रमुख सूचकांकों ने मिलाजुला प्रदर्शन किया। टेक्नोलॉजी-केंद्रित नैस्डैक में मामूली गिरावट देखी गई, जबकि डाउ जोन्स और एसएंडपी 500 हरे निशान में खुले।

  • डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average): 135.5 अंक या 0.26% बढ़कर 52,622.92 पर खुला।
  • एसएंडपी 500 (S&P 500): 4.0 अंक या 0.05% की मामूली बढ़त के साथ 7,547.64 पर खुला।
  • नैस्डैक कंपोजिट (Nasdaq Composite): 31.4 अंक या 0.12% की गिरावट के साथ 26,175.535 पर खुला।

बाज़ार को प्रभावित करने वाले कारक

शुक्रवार के कारोबारी सत्र में दो प्रमुख घटनाक्रम निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। ये कारक बाज़ार को एक दिशा देने में संघर्ष पैदा कर रहे हैं, जिससे शुरुआती कारोबार में अस्थिरता दिख रही है।

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SK Hynix की लिस्टिंग

बाज़ार दक्षिण कोरिया की प्रमुख चिप निर्माता कंपनी SK Hynix के नैस्डैक पर डेब्यू का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है। यह लिस्टिंग टेक्नोलॉजी सेक्टर और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है, जो निवेशकों को इस क्षेत्र के स्वास्थ्य का संकेत देगी।

मध्य पूर्व का तनाव

इसके अलावा, मध्य पूर्व में हालिया तनाव बढ़ने से मुद्रास्फीति की आशंकाएं बढ़ गई हैं। भू-राजनीतिक अस्थिरता से ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका सीधा असर वैश्विक मुद्रास्फीति पर पड़ता है। यह स्थिति निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने पर मजबूर कर रही है, क्योंकि बढ़ती महंगाई केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें ऊंची रखने के लिए प्रेरित कर सकती है।

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