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ट्रंप ने अमेरिका-सऊदी परमाणु समझौते को अब्राहम समझौते में शामिल होने की शर्त से जोड़ा

Summary
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु समझौता इस बात पर निर्भर करेगा कि रियाद, इज़राइल के साथ संबंध सामान्य करने वाले अब्राहम समझौते में शामिल होता है या नहीं।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और सऊदी अरब के बीच एक नागरिक परमाणु समझौता इस शर्त पर निर्भर करेगा कि रियाद, इज़राइल के साथ संबंधों को सामान्य करने के लिए अब्राहम समझौते में शामिल हो। यह घोषणा मध्य पूर्व की भू-राजनीति और ऊर्जा बाजारों के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखती है।
समझौते की प्रमुख शर्तें
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में इस शर्त का खुलासा किया। उन्होंने लिखा, "नागरिक परमाणु समझौता... पूरी तरह से इस बात पर निर्भर है कि सऊदी अरब बेहद सम्मानित और सफल अब्राहम समझौते में शामिल हो।"
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि समझौते में परमाणु सामग्री का संवर्धन शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा, "(सामग्री का कोई संवर्धन नहीं होगा!)... संयुक्त राज्य अमेरिका नागरिक (गैर-संवर्धित) परमाणु सुविधाओं का विरोध नहीं करता है।"
परमाणु समझौते का दायरा और चिंताएँ
बुधवार को घोषित यह समझौता सऊदी अरब को अमेरिकी तकनीक का उपयोग करके यूरेनियम को समृद्ध करने और परमाणु रिएक्टर बनाने की अनुमति देगा। यूरेनियम संवर्धन और परमाणु कचरे का पुनर्प्रसंस्करण, दोनों ही परमाणु हथियार विकसित करने के संभावित मार्ग हैं, जिसने अप्रसार विशेषज्ञों के बीच चिंताएँ बढ़ा दी हैं।
Adयह 2009 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ हुए एक समान अमेरिकी समझौते के विपरीत है, जिसमें UAE ने संवर्धन और पुनर्प्रसंस्करण दोनों अधिकारों को छोड़ने पर सहमति व्यक्त की थी। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि यह सौदा अमेरिका के परमाणु ऊर्जा अधिनियम में निर्धारित दुनिया के सबसे मजबूत अप्रसार समझौतों का पालन करता है।
भू-राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
अब्राहम समझौता ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान 2020 में हुआ था, जिसके तहत संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने इज़राइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। बाद में मोरक्को और सूडान भी इसमें शामिल हो गए।
सऊदी अरब का लंबे समय से यह रुख रहा है कि जब तक फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए एक रोडमैप पर सहमति नहीं बनती, तब तक वह इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। इस परमाणु सौदे को लागू होने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से भी मंजूरी लेनी होगी, जहाँ इसे जांच का सामना करना पड़ सकता है।