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ईरान तनाव से दक्षिण अफ्रीकी रैंड एक सप्ताह के निचले स्तर पर गिरा

Summary
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों द्वारा जोखिम से बचने के चलते दक्षिण अफ्रीकी रैंड अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक सप्ताह के निचले स्तर पर गिर गया।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में कमी आई है, जिसके चलते दक्षिण अफ्रीकी रैंड बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर आ गया। इस घटनाक्रम ने उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा दिया है।
प्रमुख घटनाक्रम
रिपोर्ट्स के अनुसार, 1226 GMT पर, रैंड डॉलर के मुकाबले 16.3850 पर कारोबार कर रहा था, जो इसके पिछले बंद भाव से लगभग 0.5% कम है। यह गिरावट अन्य उभरते बाजारों की मुद्राओं में देखी गई गिरावट के अनुरूप थी।
इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान था जिसमें उन्होंने ईरान के साथ एक अंतरिम शांति समझौते को खत्म करने की बात कही। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की भावना प्रबल हो गई, जिसका असर रैंड जैसी मुद्राओं पर पड़ा।
बाजार पर प्रभाव
Adदक्षिण अफ्रीकी रैंड को एक जोखिम-संवेदनशील मुद्रा माना जाता है, जिसका अर्थ है कि इसकी चाल वैश्विक बाजार की धारणाओं से काफी प्रभावित होती है। जब भी वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक रैंड जैसी मुद्राओं से पैसा निकालकर अमेरिकी डॉलर जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश करना पसंद करते हैं।
इस तनाव का असर अन्य बाजारों पर भी दिखा। तेल की कीमतें 5% से अधिक बढ़कर दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। वहीं, कई प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का प्रदर्शन लगभग स्थिर रहा। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उन्होंने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जो इस तनाव को और बढ़ाता है।
आगे की राह
विश्लेषकों का मानना है कि रैंड की निकट-अवधि की दिशा मध्य पूर्व में होने वाले घटनाक्रमों से जुड़ी रहेगी। इसके अलावा, निवेशक बुधवार को बाद में जारी होने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर भी नजर रखेंगे, जिससे भविष्य में ब्याज दरों को लेकर संकेत मिल सकते हैं।