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रूस ने 2026 तक चीन को 50 अरब क्यूबिक मीटर गैस आपूर्ति का लक्ष्य रखा

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Sep 4, 20262 min read
रूस ने 2026 तक चीन को 50 अरब क्यूबिक मीटर गैस आपूर्ति का लक्ष्य रखा

Summary

रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक के अनुसार, रूस 2026 तक "साइबेरिया की शक्ति" पाइपलाइन और कज़ाकिस्तान के रास्ते चीन को 50 अरब क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने की योजना बना रहा है।

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Background

रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने गुरुवार को घोषणा की कि देश का लक्ष्य 2026 तक चीन को 50 अरब क्यूबिक मीटर (bcm) प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करना है। यह आपूर्ति मौजूदा और निर्माणाधीन पाइपलाइन मार्गों के माध्यम से की जाएगी, जो दोनों देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी को और गहरा करेगा।

आपूर्ति का विवरण

नोवाक के बयान के अनुसार, गैस की यह मात्रा "साइबेरिया की शक्ति" (Power of Siberia) पाइपलाइन और कज़ाकिस्तान से होकर गुजरने वाले एक नए मार्ग के माध्यम से चीन तक पहुंचाई जाएगी। यह कदम रूस द्वारा अपने ऊर्जा निर्यात को एशियाई बाजारों की ओर मोड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

यह विकास रूस की ऊर्जा कंपनी गैज़प्रॉम (Gazprom) और चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (CNPC) के बीच चल रहे सहयोग को रेखांकित करता है। दोनों सरकारी कंपनियां इस महत्वाकांक्षी ऊर्जा गलियारे को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

नई 'बैकाल पावर' पाइपलाइन पर चर्चा

आपूर्ति बढ़ाने की योजना के अलावा, नोवाक ने एक दूसरी प्रमुख पाइपलाइन परियोजना पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने खुलासा किया कि गैज़प्रॉम और CNPC "साइबेरिया की शक्ति-2" नामक एक नई पाइपलाइन पर बातचीत कर रहे हैं, जिसे अब "बैकाल पावर" (Baikal Power) नाम दिया गया है।

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इस परियोजना पर आगे की चर्चा के लिए शुक्रवार को एक अंतर-सरकारी आयोग की विशेष बैठक निर्धारित है। यह नई पाइपलाइन रूस से चीन तक गैस निर्यात की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती है।

बाज़ार के लिए मायने

यह घोषणा वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है, जहाँ रूस यूरोप से हटकर एशिया, विशेष रूप से चीन की ओर अपने ऊर्जा प्रवाह को मज़बूती से पुनर्निर्देशित कर रहा है। चीन के लिए, यह सौदा उसकी बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करता है।

निवेशकों और बाज़ार विश्लेषकों के लिए, यह रूस-चीन ऊर्जा अक्ष की मज़बूती को दर्शाता है, जिसका वैश्विक प्राकृतिक गैस की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर प्रभाव पड़ सकता है। यह विकास यूरेशिया में भू-राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी नया आकार दे सकता है।

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